जब मैं गर्भ से थी तो... कम पड़े कागज तो हाथ पैरों में लिख डाली दर्दभरी दास्तां
लखनऊ. हरेक मां-बाप का अरमान होता है कि उनकी बेटी को ससुराल में सम्मान अौर बहुत प्यार मिले। लेकिन उन अरमानों में तब पानी फिर जाता है जब ससुराल पक्ष बहुअों को दहेज के लिए प्रताड़ित करते है। हिन्दू समाज की अनेक कुरीतियों में आजकल दहेज की प्रथा अत्यधिक दुखदायी बनी हुई है। सभी लोग इससे दुखी हैं, साथ ही सभी लोग इससे बेतरह चिपके हुए हैं। ताजा मामला काकोरी के बुधड़िया गांव का है, जहां शुक्रवार को विवाहिता रुचि यादव (21) ने मायके में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। शव ऊपरी मंजिल पर लोहे के रॉड से दुपट्टे के सहारे लटकता मिला। पुलिस ने छानबीन कर शव पोस्टमार्टम को भेजवाया। पड़ताल में पुलिस के हाथ आठ पन्ने का सुसाइड नोट मिला। इसके अलावा विवाहिता ने हथेली पर लिखा था कि ससुरालवालों को सजा जरूर दिलाइएगा। मृतका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने पति सहित चार पर केस दर्ज कर लिया है।
यह रहा पूरा मामला
पिता रूपचंद्र के मुताबिक बेटी रुचि यादव की शादी 21 फरवरी 2014 को मोहनलालगंज के गंगाखेड़ा गांव निवासी विपिन यादव से की थी। विवाह के बाद से उसे ससुरालीजन अक्सर परेशान करते थे। इसके चलते रुचि ने ससुराल छोड़ा मायके में रहने लगी थी।
दहेज की प्रताड़ना से तंग आकर उनकी बेटी ने दूसरी मंजिल स्थित अपने कमरे में दुपट्टे और लोहे के एंगल के सहारे फांसी लगा ली। रुचि ने जब आत्महत्या की थी, तब पिता ड्यूटी पर गए थे, जबकि भाई योगेंद्र और मां खेत पर थे।
आठ पन्नों का मिला सुसाइड नोट
वहीं पुलिस के पहुंचने पर महिला के कमरे से आठ पन्नों का सुसाइड नोट मिला। इस सुसाइड नोट में महिला ने लिख है कि मैं अपने ससुराल वालों से परेशान होकर आत्महत्या कर रही हूं। मेरे मायके वाले बहुत अच्छे हैं, उनकी कोई गलती नहीं है। मेरे ससुराल वाले मुझे बहुत मारते-पीटते थे। मायके में आई तो पति बहला-फुसलाकर साथ ले गए, लेकिन फिर से वही सब शुरू हो गया।
दो लाख रुपए की मांग कर रहे थे ससुराल वाले
रुचि ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए लिखा है कि जब मैं गर्भ से थी तब भी ससुराल वाले मुझसे दिन भर काम कराते थे। आरोप है कि ससुरालीजन दहेज में दो लाख रुपये की मांग करते थे। पुलिस ने रूपचंद्र की तहरीर पर पति विपिन ससुर राम चरित, सास और ननद के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
रुचि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि रक्षाबंधन पर वह मायके आई थी। मेरा पति मुझे अस्पताल में ही छोड़कर चला गया। भगवान ने मेरे बच्चे को दुनिया में आने से पहले ही ले लिया। मायके वाले न होते तो मैं तभी मर गई होती। उन्होंने मुझे बचाया, मेरी इलाज कराया। मगर पति ने फिर भी नहीं पूछा की कैसी हो। उसने लिखा है कि पति ने न कभी मायके वालों को खुश रहने दिया और न ही मुझे। सोचा सब ठीक हो जाएगा। पति को समझ आ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
हथेली में लिखा दर्द
एसओ काकोरी यशकांत सिंह के मुताबिक कमरे से आठ पन्ने का सुसाइड नोट बरामद हुआ। इसके अलावा मृतका की हथेली व पैरों पर काफी कुछ लिखा था। आरोपियों की तलाश की जा रही है। हथेली पर लिखा था कि हमने सारी बातें पेपर लिख दी है। सबका ध्यान रखना। ससुरालवालों को सजा जरूर दिलाइएगा। कभी ससुराल वाले खुश नहीं थे। वजह से इस स्थिति में पहुंची।