इस बीच मायावती ने एक बात पूर्णतः स्पष्ट कर दी जिससे समाजवादी पार्टी को झटका लग सकता है।
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी सु्प्रीमो मायावती इन दोनों समाजवादी पार्टी से अपने रिश्ते को और मजबूत बनाने में जुटी हैं। वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव भी इसमें पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन इस बीच मायावती ने एक बात पूर्णतः स्पष्ट कर दी जिससे समाजवादी पार्टी को झटका लग सकता है। मायावती ने यह साफ कहा है कि फूलपुर व गोरखपुर उपचुनाव की तरह वो अब किसी भी दल को सहयोग नहीं करेगी।
सोमवार को बहुजन समाज पार्टी के विधायक, वरिष्ठ नेता तथा को-आर्डीनेटनर के साथ बैठक में मायावती ने आगे की रणनीति तय की है। इसमें तय हुआ है कि अब पार्टी प्रदेश में होने वाले उप चुनाव में किसी भी पार्टी की मदद नहीं करेगी। दरअसल बैठक के बाद मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा पर जमकर निशाना साधा साथ ही उन्होंने सपा से गठबंधन की बात को भी कबूला, लेकिन कांफ्रेंस के बाद जारी एक प्रेज रिलीज में कहा गया है कि बीएसपी का कैडर अब किसी भी उपचुनाव में किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगा।
कैराना व बिजनौर के नूरपुर विधानसभा उपचुनाव पर गहराया सस्पेंस-
मायावती के इस बयान के बाद कैराना लोकसभा के साथ बिजनौर के नूरपुर विधानसभा उप चुनाव पर सस्पेंस गहराने लगा है। बयान से ये तो स्पष्ट है कि बसपा इन चुनावों में किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी। साथ ही अब पार्टी चुनाव में उस तरह से प्रचार भी न करे, जैसा सपा के प्रत्याशियों के लिए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में किया गया था।
सपा से गठबंधन 2019 चुनाव तक-
गठबंधन से परहेज करने वाली मायावती बीते कुछ दिनों से सपा के साथ तालमेल बैठाने में लगी है। उन्होंने साफ कहा है कि राज्यसभा चुनाव हारने के बाद तो इस गठबंधन को और मजबूती मिली है। हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा में सीटों का बंटवारा होना बाकी है, लेकिन दोनों बंटी हुई सीटों पर सहमत दिखेंगे वहीं यह भी उम्मीद लगाई जा रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का चेहरा मायावती ही होंगी।