अपने अधिकारों की खातिर एक मंच पर प्रदेश के मेयर, राज्यपाल से बयां किया अपना दर्द
लखनऊ. अपने अधिकारों को बचाने के लिए और 25 साल पहले देखा सपना पूरा करने के लिए प्रदेश भर के मेयर एक मंच पर आए। 74 वें शंशोधन को लेकर कई घंटों की बैठक के बाद देर शाम मेयर कौंसिल ने राज्यपाल और नगर विकास मंत्री को संशोधन लागू करने का ज्ञापन सौंपा। मेयर कौंसिल में भाजपा मेयरों ने साफ़ किया कि यदि 2019 लोकसभा चुनाव से पहले 74 वां संशोधन लागू हो जाता है तो इसका सीधा फायदा पार्टी को केंद्र स्तर पर मिलेगा। उनका कहना है कि इससे विकास कार्यों में गति आएगी और पार्टी की विकास की छवि और मजबूत होगी। विकास की नदी पार्टी को प्रदेश से 80 सीटें जिता सकती हैं।
मेयर ने बताया कि क्यों स्मार्ट और स्वच्छ शहरों में पिछड़ा यूपी
मेयरों की कौंसिल ने ये स्पष्ट किया कि आखिर प्रदेश का एक भी शहर स्वच्छता में टॉप 10 क्यों नहीं है और साथ ही क्यों नहीं अब तक चयनित होने के बाद भी शहर स्मार्ट हो सके। उनका मानना है कि मेयर एक संविधानिक पद है। लेकिन सिर्फ यूपी और बिहार की पूर्व सरकारों ने ही अब तक 74 वां संशोधन लागू न कर मेयरों के हाथ बांधे रखे हैं। अभी डेवलपमेंट अथॉरिटी हो या जल निगम इनकी जवाबदेही निगम के प्रति नहीं है। संशोधन के लागू होने से सभी कार्यों की प्लानिंग एक छत के नीचे हो सकेगी। इससे पैसा भी बचेगा।
मेयर ने दर्ज कराइ अपनी शिकायत
सभी मेयर ने बैठक में एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसे ज्ञापन के साथ सौंपा गया। इसके साथ ही उन्होंने अपना दर्द भी जाहिर किया। पत्र में कहा गया कि अभी विकास प्राधिकरण, जल निगम, बिजली, आदि विभाग अपनी योजना बनाने से पहले उनसे चर्चा नहीं करते। इसका खामियाजा ये होता है कि एक विभाग सड़क बनवाता है तो दूसरा खोद देता है। जनता को असुविधा तो होती ही है साथ ही पैसा भी बर्बाद होता है।
उप मुख्यमंत्री का लेंगे सहयोग
प्रदेश में दो को छोड़कर सभी 14 निगमों में भाजपा मेयर हैं। दिल्ली से लखनऊ तक सरकार भी भाजपा की है। जिस मेयर की अगुवाई में यूपी में भाजपा ने बीते दस साल इस अधिकार को पाने के लिए संघर्ष किया वे उप-मुख्यमंत्री हैं। मेयरों का दावा है कि कि निकायों को उनका सही दर्जा दिलाने के उप मुख्यमंत्री खुद नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री से पैरवी करेंगे।
लागू होने से होंगे ये लाभ
संशोधन लागू होने से शहर की सारी समस्याओं के समाधान की जिमेदारी संबंधित नगर निकाय की होगी। लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए अलग अलग विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विकास के कामों में तालमेल की कमी भी दूर होगी। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। अवैध कालोनियों, अतिक्रमण जैसी समस्याएं भी दूर होंगी। विकास प्राधिकरण और टाउन प्लानिंग पूरी तरह निकायों के हाथ में होगी। इससे निकायों का आर्थिक ढांचा भी मजबूत होगा। यातायात की व्यवस्था आने से अतिक्रमण और जाम की जिमेदारी तय होने से जनता को राहत मिलेगी। पुलिस हो या विकास प्राधिकरण दोनों में ताल मेल नहीं दिखता। स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत योजना का काम और ज्यादा प्रभावी तरीके से उत्तर प्रदेश में दिखाई देता।
ये मेयर रहे उपस्थित
नवीन जैन (आगरा), प्रमिला पांडेय (कानपुर), सीताराम जैस्वाल (गोरखपुर), विनोद अग्रवाल (मुरादाबाद), संजीव वालियान (सहारनपुर), डॉ मुकेश आर्य बंधु (मथुरा), अभिलाषा गुप्ता (इलाहाबाद), आशा शर्मा (गाज़ियाबाद), डॉ उमेश गौतमम (बरेली), मृदुला जैसवाल (वाराणसी), नूतन राठौर (फ़िरोज़ाबाद), ऋषिकेश उपाध्याय (अयोध्या) मौजूद रहे। जबकि मेरठ, अलीगढ और झाँसी के मेयर बैठक में शिरकत नहीं कर सके।
चर्चा के मुख्य बिंदु -
स्थापना निधि, स्मार्ट सिटी, प्रोजेक्ट अमृत योजना में मंडलायुक्त को अध्यक्ष बना रखा है उसमें महापौर को अध्यक्ष बनाया जाए ।
मेयर का प्रोटोकॉल सभी शहरों के अधिकारियों को भेजना और उस का कड़ाई से पालन करवाना।
नगर आयुक्त को कोई भी कार्य बिना महापौर के अनुमोदन के ना हो।
डूडा निर्देशक नगर आयुक्त होते हैं डूडा को नगर निगम में लाकर महापौर के अधीन लाया जाए।
सरकार की तरफ से मेयर आईडी, सचिवालय पास और गाड़ी पास जारी किया जाए।
विकास प्राधिकरण का चेयरमैन कमिश्नर की जगह महापौर को बनाया जाए।
मुख्यमंत्री जैसे विधायक और सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार का दिन निश्चित कर चुके हैं उसी प्रकार से महापौरों के लिए एक दिन और समय निश्चित हो।
पार्षद भत्ता बनाया जाए और पार्षदों को भत्ता दिए जाने का अधिकार महापौर को हो।
निकायों में अधिकारी कम है, अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जाए।
लखनऊ नगर निगम महापौर काउंसिल के भवन के हेतु जमीन उपलब्ध कराएगा और बाकी उत्तर प्रदेश सरकार उस पर भवन बनवाये