
करिश्मा लालवानी, लखनऊ. अभी कुछ दिन पहले हरियाणा कि मानुषी छिल्लर ने मिस इंडिया का खिताब जीता। मानुषी से जब ये सवाल पूंछा गया कि किस प्रोफेशन में सबसे ज्यादा सैलरी होनी चाहिए। इस पर मानुषी का जवाब था-मां का काम ऐसा है, जो बिना किसी शिकायत के सबसे ज्यादा काम करती है। सच भी है। एक मां अपने बच्चों के लिए अपना कैरियर तक त्याग देती है। लेकिन इन सबके बावजूद सवाल ये है कि आज की जनरेशन में कुछ महिलाएं शादी करने या शादी करने के बाद मां बनने से क्यों कतराती हैं। इस बारे में पता लगाने के लिए लखनऊ की 100 से अधिक कामकाजी महिलाओं के बीच बातचीत की गई। बातचीत में कई रोचक तो कई चौकाने वाले कारण सामने आए। निष्कर्ष यह निकला कि कैरियर बनाने के दबाव में महिलाएं शादी के बारे में सोच ही नहीं पातीं।
पहले कैरियर फिर शादी
आज महिलाओं और लड़कियों के लिए भी सबसे पहला और जरूरी कार्य बन गया है कैरियर। लड़कियां पहले पढ़ाई और बाद में फिर नौकरी की चाह में अपनी उम्र गुजार देती हैं। उन्हें लगता है कि कैरियर ज्यादा जरूरी है शादी से। और जब शादी की बारी आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
शादी करना है झंझट
आज के जेनरेशन की महिलाएं शादी ही नहीं करना चाहतीं। उन्हें लगता है कि शादी करना झंझट का काम है। सीडीआरआई मे कार्यरत एक महिला वैज्ञानिक का कहना है कि शादी के बिना भी हम खुश हैं। तो आखिर शादी क्यों की जाए। इस तरह की धारणाएं अब तेजी से जोर पकड़ रही हैं।
तब तक हो गई देर...
कई महिलाएं शादी तो कर लेती हैं लेकिन कॅरियर बनाने के चक्कर में फैमिली प्लानिंग अपनाती हैं। इसके बाद उम्र की ढलान में वह बच्चे के बारे में सोचती हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। कहने का मतलब यह कि खुद को साबित करने के चक्कर में ये इतना समय ले लेती हैं कि बच्चे पैदा करने की उम्र ही निकल जाती है।
मन खुश तो सब खुश
कुछ महिलाएं मां बनने से इसलिए बचती हैं कि खुशहाल जिंदगी जीने के लिए मां बनना जरूरी नहीं है। मन से खुश होना जरूरी है। दूसरे जब तक उनका पति बच्चे पैदा करने के लिए तैयार न हो यानी जिम्मेदारी उठाने के लिए राजी न हो वह बच्चे पैदा नहीं करेंगी। दोनों में सहमति न बन पाने की वजह से भी बच्चे पैदा नहीं हो पाते।
मां-बाप की सेवा पहले
अब लड़कियों में यह भाव जाग रहा है कि उनके लिए मां बाप ज्यादा जरूरी हैं। पति की जरूरत नहीं है। इसलिए तमाम लड़कियां शादी ही नहीं करती हैं। खासकर ऐसी लड़कियां जहां घर में कमाने वाला कोई नहीं है। वहां वे ही घर की जिम्मेदारी उठाती हैं और शादी नहीं करतीं।