दो जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लखनऊ में आयोजित भाजपा की परिवर्तन रैली में शिरकत की। भाजपा की इस रैली में भारी संख्या में भीड़ उमड़ी, मोदी ने अपने भाषण में इस बात का जिक्र भी किया। लेकिन, एक टीस शायद उनको रह गई होगी कि फुटेज या कवरेज के मामले में वे 'समाजवादी दंगल' से पीछे रह गए।
मोदी लखनऊ में मुलायम दिल्ली
दो जनवरी को नरेन्द्र मोदी लखनऊ में थे तो समाजवादी दंगल में उतरा मुलायम खेमा दिल्ली पहुंचा हुआ था। भारी भीड़ होने के बावजूद अखबारों और टीवी चैनलों में मोदी के रैली की चर्चा औपचारिक ही रही। मीडिया में छाया समाजवादी दंगल ही रहा।
मोदी को चर्चा से बाहर रहने को भिड़े थे समाजवादी
30 दिसंबर, 31 दिसंबर और 1 जनवरी लगातार मीडिया में 'समाजवादी दंगल' छाया रहा। 30 दिसंबर को पहले मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश यादव और चचेरे भाई रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर किया। 31 दिसंबर को निष्काषन वापस लिया। 1 जनवरी को राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश ने पापा की कुर्सी छीन खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवाया। और फिर जब मोदी का कार्यक्रम था मुलायम सिंह अपने भाई शिवपाल और अमर सिंह के साथ चुनाव आयोग पहुंच गए।2 जनवरी को इधर मोदी लखनऊ में थे तो 'समाजवादी दंगल' दिल्ली में। अब 3 जनवरी को समाजवादी दंगल खत्म होने की खबरें आ रही हैं। सुलह समझौते की बातें हो रही हैं। तो क्या ये सब केवल इसलिए था कि मोदी की रैली की चर्चा को कम किया जा सके? किसी भी तरह रैली की 'फुटेज' छीनी जा सके?
यह बात अब साफ हो चुकी है कि अगर सपा '
बदनाम हुआ तो क्या नाम न होगा
' की राह चल रही थी तो वह अपने प्लान में कमोबेश ही सही लेकिन सफल रही। मोदी की रैली की चर्चा सिर्फ और सिर्फ उमड़ी भीड़ पर केन्द्रित होकर रह गई है। अब देखना ये होगा कि सपा अपने प्लान से अपने परंपरागत वोटर को बचाए रखने में कामयाब हो पाती है या नहीं।
यूपी में हिट नहीं रही मोदी की रैली
ऐसा नहीं है कि नरेन्द्र मोदी के साथ ये पहली बार हुआ हो, मोदी जब-जब यूपी के चुनावी मैदान में 'राहुल द्रविण' बन कर उतरे 'युवराज सिंह' कोई और ही बन गया।
2 जनवरी- भारी रहा 'समाजवादी दंगल'
2 जनवरी को लखनऊ में बीजेपी की परिवर्तन महारैली हुई। हफ्तेभर पहले से ही रैली के जरिए प्रचार पाने की भी पूरी तैयारी थी। लेकिन रैली से पहले ही 28 दिसंबर से सपा परिवार और पार्टी का दंगल शुरू हो गया, जो जारी है। इस दौरान मोदी की रैली चैनलों पर उतनी हिट नहीं हो पाई जितनी उम्मीद थी। चैनल से लेकर अखबारों तक में सपाई दंगल को तरजीह मिली।
22 दिसंबर- राहुल और अखिलेश ने भी बांटी फुटेज
22 को मोदी वाराणसी में थे। उसी दिन बहराइच में राहुल गांधी की रैली थी और इधर यूपी सरकार ने 17 ओबीसी जातियों को एससी का दर्जा दे दिया। ऐसे में तीनों ने बराबर फुटेज बांट ली।
19 दिसंबर- मोदी कानपुर, राहुल जौनपुर तो लखनऊ में अखिलेश
कानपुर में मोदी की रैली और राहुल की जौनपुर में रैली थी। ऐसे में अखिलेश सरकार ने अचानक यश भारती और रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड बांट दिए। मीडिया कवरेज मोदी और राहुल से अखिलेश की ओर शिफ्ट हो गया।
11 दिसंबर- कोहरा बना विलेन
11 दिसंबर को प्रधानमंत्री की रैली बहराइच में थी इसमें विलेन बन कर सामने आया कोहरा। कोहरे के कारण मोदी का हेलिकॉप्टर रैली स्थल पर लैंड नहीं कर सका और उन्हें वापस लखनऊ आना पड़ा। उन्होंने लखनऊ से ही हेलिकॉप्टर में बैठे-बैठे ही मोबाइल से लोगों को संबोधित किया।
27 नवंबर- पंजाब जेल ब्रेक ने लूट ली फुटेज
27 नवंबर को मोदी कुशीनगर में थे उस दिन पंजाब में जेल ब्रेक हो गई। यूपी में हाई अलर्ट हो गया और फुटेज उस ओर मुड़ गई।
20 नवंबर- रेल हादसे ने मोदी को किया साइड
20 नवंबर को आगरा रैली वाले दिन कानपुर के पास बड़ा ट्रेन हादसा हो गया। इस हादसे की खबरें ही छाई रहीं। मोदी की रैली को बहुत कम जगह मिली। आगरा से कानपुर तक न आने की वजह से प्रधानमंत्री विपक्षियों के निशाने पर रहे।
24 अक्टूबर- यादव परि'वार' ने लूटी थी फुटेज
24 अक्टूबर को परिवर्तन रैलियों की शुरुआत से पहले महोबा में नरेंद्र मोदी ने बड़ी रैली की लेकिन पहले से समाजवादी पार्टी और परिवार में चल रहा झगड़ा उफान पर पहुंच गया। मुलायम ने पार्टी कार्यालय में आम सभा की बैठक बुलाई। इसमें मंच पर धक्का-मुक्की हो गई। सपा मुख्यालय के बाहर से लेकर सीएम आवास के बाहर तक अखिलेश और शिवपाल समर्थक आपस में भिड़ते रहे। महोबा रैली इस झगड़े की भेंट चढ़ गई।
12 अक्टूबर- दशहरे की रौनक में मोदी रह गए पीछे
दशहरा के दिन मोदी लखनऊ में थे। लखनऊ के ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला मैदान से मोदी ने जनता को संबोधित तो किया लेकिन दशहरे के जोश में उस भाषण की गूंज भी टिक न पाई। राजधानी में अखबारों में अवकाश था तो खबरे एक दिन बाद आई, टीवी पर जरूर फुटेज मिली लेकिन कुछ समय के लिए।