
Mohsin Raza Appointed UP Minority Commission Chairman: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पूर्व मंत्री मोहसिन रजा की अहम भूमिका तय हो गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उन्हें नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए उत्तर प्रदेश राज्य अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। सबसे खास बात यह है कि इस नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा भी प्राप्त होगा।
मोहसिन रजा लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं और वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी रह चुके हैं। इससे पहले साल 2017 में जब पहली बार योगी सरकार सत्ता में आई थी तब उन्हें अल्पसंख्यक कल्याण मुस्लिम वक्फ और हज विभाग में राज्य मंत्री का महत्वपूर्ण जिम्मा सौंपा गया था।
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद की यह अहम जिम्मेदारी मिलने से कुछ दिन पहले ही 12 अगस्त को मोहसिन रजा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के वक्फ बोर्डों में कथित अनियमितताओं का बड़ा मुद्दा उठाया था।
रजा ने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि दोनों वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जिला स्तर पर एसआईटी (SIT) जांच कराई जाए और इनका विशेष ऑडिट भी हो। उन्होंने दावा किया था कि पहले यूपी में 2 लाख से ज्यादा रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियां थीं लेकिन अब यह आंकड़ा महज 1.27 लाख रह गया है। रजा का आरोप था कि पिछली सरकारों में ठीक से ऑडिट न होने के कारण करीब 70 हजार से ज्यादा वक्फ संपत्तियां या तो रिकॉर्ड से गायब हो गई हैं या फिर उन पर माफियाओं का अवैध कब्जा हो गया है।
मोहसिन रजा का सफर काफी दिलचस्प रहा है। राजनीति में आने से पहले वह एक बेहतरीन क्रिकेटर रह चुके हैं और प्रतिष्ठित रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। इसके अलावा उनका रुझान मॉडलिंग और अभिनय की तरफ भी रहा है। अपनी पर्सनालिटी के दम पर उन्होंने साल 1995 में प्रिंस लखनऊ का खिताब भी जीता था।
राजनीति की बात करें तो मोहसिन रजा ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले BJP का दामन थामा था। उनकी वाकपटुता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद 2017 में उन्हें मंत्री बनाया गया। अब अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और कैबिनेट रैंक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी सियासी अहमियत एक बार फिर बढ़ गई है। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के तौर पर मोहसिन रजा को कैबिनेट रैंक का दर्जा मिलेगा। ऐसे में उनकी नई जिम्मेदारी को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।