लखनऊ

विदेशी मेहमानों के स्वागत में सजाया जा रहा नवाबों का शहर लखनऊ, बदली जा रही रंगत

लखनऊ में जी20 को लेकर तैयारियां बहुत ही जोरों पर चल रही, स्मारकों में लगे बेंचों का रंग रोगन किया जा रहा है, और खाली पड़ी जगहों पर फूलों के पौधे रोपे गए हैं।
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Updated: 6 Feb 2023, 5:37 PM IST
  नगर आयुक्त बोले- पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकसित
नगर आयुक्त बोले- पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकसित

लखनऊ में कैसरबाग से हुसैनाबाद तक हेरिटेज जोन में स्थित ऐतिहासिक और विरासत भवनों और स्मारकों को जी 20 और जीआईएस कार्यक्रमों में प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए युद्ध स्तर पर पुनर्निर्मित किया जा रहा है। हुसैनाबाद ट्रस्ट बड़ा इमामबाड़ा और नौबत खाना पर काम कर रहा है, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) रेजीडेंसी को नया रूप दे रहा है और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) सभी स्मारकों को रोशनी से रोशन कर रहा है।

हेरिटेज जोन की रही रंगाई -पुताई

इन स्मारकों में लगे बेंचों पर भी रंग रोगन किया जा रहा है, और खाली पड़ी जगहों पर फूलों के पौधे रोपे गए हैं। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी और एलएमसी डिवाइडर की पुताई, गमले लगाने और फ्लाईओवर व चारदीवारी के नीचे की दीवारों को रंगवा रहे हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़कों का नवीनीकरण भी किया जा रहा है।


नगर आयुक्त बोले- पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकसित

अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र को इसलिए चुना गया, क्योंकि अधिकांश स्मारक, उस हिस्से में स्थित हैं, जहां प्रतिनिधि आएंगे और शहर की नवाबी संस्कृति और इतिहास के बारे में जानेंगे। नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने कहा, सौंदर्यीकरण अभियान आगे भी जारी रहेगा और क्षेत्र को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

स्मारकों पर चल रहा काम: एलडीए

एलडीए के कार्यकारी अभियंता मनोज कुमार ने कहा, अभी तक तीन स्मारकों बड़ा इमामबाड़ा, नौबतखाना और रेजीडेंसी में प्रकाश व्यवस्था की जा रही है। पांच और स्मारक क्लॉक टॉवर, रूमी दरवाजा, सादात अली खान मकबरा, कोठी दरशवान विलास और कोत्शी क्षेत्र में रात्रि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दूसरे चरण में गुलिस्तान-ए-इराम को रोशन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि रात्रि पर्यटन के लिए विकसित किए जा रहे, हेरिटेज क्षेत्र के सौंदर्यीकरण को बनाए रखने और बनाए रखने के लिए एक तंत्र बनाया जाएगा। लोगों के बीच अपनेपन की भावना को आत्मसात करने के लिए इस तरह के तंत्र में सार्वजनिक भागीदारी भी होनी चाहिए, इससे उन्हें स्मारकों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके।

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