
बोले- भाजपा के पास जनता के मुद्दे नहीं बचे, इसलिए ला रही है फिजूल के विधेयक; वंदे मातरम् पर सभी भारतीयों की आस्था (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
Congress Slams Proposed Vande Mataram Bill:उत्तर प्रदेश में 'वंदे मातरम्' के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर सजा का प्रावधान करने वाले प्रस्तावित विधेयक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस प्रस्तावित कानून पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि "वंदे मातरम् का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने वाला कोई हिंदुस्तानी हो ही नहीं सकता। ऐसा करने वाला व्यक्ति न तो देशभक्त कहलाने योग्य है और न ही भारतीय संस्कृति को समझने वाला।"
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता की भावना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और भारतीय अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस गीत के प्रति हर भारतीय के मन में सम्मान और श्रद्धा है, इसलिए इसके लिए अलग से दंडात्मक कानून लाने की आवश्यकता समझ से परे है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा कि "वंदे मातरम् पर कौन ऐसा कमीना और निर्लज्ज हिंदुस्तानी होगा, जो बाधा डालेगा? वंदे मातरम् पर बाधा डालने का कोई प्रयास कोई हिंदुस्तानी कर ही नहीं सकता।" उन्होंने कहा कि यदि कोई विदेशी नागरिक ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए देश में पहले से ही पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे में नया कानून लाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
राजपूत ने कहा कि देशभक्ति किसी कानून के डर से नहीं, बल्कि नागरिकों की भावना और संस्कारों से पैदा होती है। भारत की जनता हमेशा राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रतीकों का सम्मान करती आई है।
सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि भाजपा के पास अब जनता के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कुछ बचा नहीं है। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के विधेयकों को सामने लाया जा रहा है। आगे उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार ऐसे विषयों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाने की कोशिश करती है, जिनसे चुनावी ध्रुवीकरण हो सके। उनके मुताबिक सरकार को कानून बनाने से पहले यह देखना चाहिए कि प्रदेश और देश की जनता किन समस्याओं से जूझ रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि देश भक्ति किसी व्यक्ति पर थोपने की चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् ने लोगों को प्रेरित किया और आज भी यह गीत हर भारतीय के लिए सम्मान का विषय है। लेकिन किसी भावना को कानून के जरिए लागू करने के बजाय लोगों के भीतर जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अधिकार और कर्तव्य दोनों देता है। राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का नैतिक दायित्व है और अधिकांश भारतीय इसका पालन भी करते हैं।
वंदे मातरम् से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रहा है, जबकि विपक्ष का एक वर्ग इसे अनावश्यक कानून बताते हुए सवाल उठा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मनोज उपाध्याय का मानना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे हमेशा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। ऐसे विषयों पर सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। इसी क्रम में सुरेंद्र राजपूत का बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
सुरेंद्र राजपूत ने सरकार से अपील की कि वह कानून बनाने से अधिक प्राथमिकता जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान को दे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर आय, महिलाओं को सुरक्षा, व्यापारियों को आर्थिक मजबूती और आम लोगों को महंगाई से राहत की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मुद्दों पर प्रभावी कदम उठाएगी तो जनता का विश्वास और मजबूत होगा। केवल राजनीतिक बहस को नए मुद्दों की ओर मोड़ने से आम लोगों की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।
सुरेंद्र राजपूत के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। राष्ट्रीय भावना, संविधान और कानून के दायरे में इस प्रस्तावित विधेयक को लेकर अब राजनीतिक दल अपनी-अपनी व्याख्या और तर्क जनता के सामने रख रहे हैं। फिलहाल इतना तय है कि प्रस्तावित विधेयक ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रीय सम्मान का विषय बता रहा है, वहीं कांग्रेस इसे अनावश्यक कानून बताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रही है। आने वाले समय में इस विधेयक पर राजनीतिक और विधायी स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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Updated on:
17 Jul 2026 01:10 pm
Published on:
17 Jul 2026 01:10 pm
