
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में "शास्त्र पूजा" की। इसके साथ ही भारत- चीन सीमा के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में सेना के जवानों के साथ दशहरा मनाया। राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे के साथ अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर भारत की सैन्य तैयारियों की व्यापक समीक्षा की और सीमा की रक्षा करने के लिए सैनिकों की प्रशंसा की।
राजनाथ सिंह ने बुम-ला और कई अन्य अग्रिम चौकियों का दौरा करने के बाद सैनिकों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए देश के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
देश को जवानों पर गर्व है: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन के माध्यम से देश की सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जवानों से कहा, "मुश्किल परिस्थितियों में आप जिस तरह से सीमा की रक्षा कर रहे हैं, उसके लिए जितनी भी सराहना की जाए कम है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि देश के लोगों को आप पर गर्व है।"
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है: सिंह
तवांग में सैनिकों के साथ शस्त्र पूजा करने के बाद रक्षामंत्री ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उन्होंने अपने संबोधन में बहादुर सशस्त्र बलों के कर्मियों की "धार्मिकता और धर्म" को विजयादशमी के त्योहार के लोकाचार का जीवित प्रमाण बताया।
रक्षामंत्री ने कहा कि सशस्त्र बलों की वीरता और प्रतिबद्धता विश्व स्तर पर भारत के बढ़ते कद के पीछे मुख्य कारणों में से एक है। यह अब सबसे शक्तिशाली देशों में से एक है। रक्षा मंत्री का एलएसी के निकट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर सैनिकों के साथ दशहरा का जश्न ऐसे समय में मनाया गया है जब भारत और चीन तीन साल से अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में कुछ घर्षण बिंदुओं पर कड़वे गतिरोध में लगे हुए हैं।
कई सालों से दशहरे पर "शस्त्र पूजा" करते हैं राजनाथ
राजनाथ सिंह पिछले कई सालों से दशहरे के दौरान "शस्त्र पूजा" करते रहे हैं, जिसमें पिछली एनडीए सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भी शामिल है। भारतीय और चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में कुछ घर्षण बिंदुओं पर तीन साल से अधिक समय से टकराव की स्थिति में हैं, जबकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली है।
वहीं, भारत का कहना है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में शांति नहीं होगी तब तक चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते। सेना ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सेक्टर सहित लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती काफी बढ़ा दी है।