सपा टूटने के कगार पर, दो फाड़ हुई मुलायम की पार्टी तो ये जाएंगे अखिलेश के साथ!

पार्टी से बाहर होने के बाद और बढ़ा अखिलेश का कद, मुलायम के खास गए अखिलेश के पास

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Dec 30, 2016
Yadav Pariwar
लखनऊ।
पिछले काफी वक्त से समाजवादी पार्टी और यादव परिवार में जो कुछ भी चल रहा है वह सूबे की सबसे बड़ी पार्टी को फिलवक्त दो टुकड़ों में बांटता नजर आ रहा है। पार्टी दो धुरों में बंट गई है। एक धुरा है अखिलेश यादव का जो सरकार चला रहे हैं। दूसरा धुरा है शिवपाल यादव का जो संगठन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। शुक्रवार को नेता जी ने अखिलेश और रामगोपाल यादव को पार्टी से 6-6 साल के लिए निष्काषित करने के बाद साफ जाहिर हो रहा है कि सपा में दो धड़े हो चुके हैं। मतलब साफ है कि समाजवादी पार्टी दो खेमों में बंट चुकी है, अब बस औपचारिक घोषणा होना बाकी है। आइए नजर डालते हैं कि अगर सपा टूटती है तो समाजवादी पार्टी का कौन सदस्य किस खेमे में जा सकता है...


शिवपाल यादव


सपा के प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के भीतर अंतर्कलह की शुरुआत इन्हीं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के उफान लेने से हुई है। मुलायम और शिवपाल की जोड़ी को लोग राम-लक्ष्मण की संज्ञा देते आए हैं जाहिर है शिवपाल मुलायम खेमे में ही जाएंगे।


रामगोपाल यादव


सपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव मौजूदा हालातों में अखिलेश यादव के राजनीतिक संरक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। जाहिर है वे अखिलेश के साथ ही नजर आएंगे।


आजम खान


मुलायम सिंह यादव के पुराने साथी। अमर सिंह की सपा में वापसी के बाद आहत। फिलहाल अखिलेश की तारीफें करते नजर आते हैं। सपा टूटती है तो अखिलेश के साथ नजर आ सकते हैं।


बेनी प्रसाद वर्मा


बेनी प्रसाद वर्मा सपा के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। हालांकि उन्होंने पुत्र प्रेम में सपा छोड़ दी थी लेकिन अभी कुछ महीनों पहले ही उन्होंने घर वापसी की है। सपा टूटी तो जाहिर है मुलामय के साथ जाएंगे।


अमर सिंह


मुलायम सिंह का अमर प्रेम जगजाहिर है। भारी विरोध के बावजूद न उन्होंने सपा में अमर की वापसी कराई बल्कि राष्ट्रीय महासचिव का पद भी वापस दिया। जाहिर है वे अब मुलायम सिंह को छोड़ कर जाने वाले नहीं।


किरणमय नंदा


सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हाल के दिनों में खुलकर अखिलेश का समर्थन करने वाले नेता। फिलहाल राज्यसभा सांसद। पार्टी टूटती है तो अखिलेश के बजाय मुलायम को चुनेंगे।


रेवतीरमण सिंह


सपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक, मुलायम सिंह यादव के खास चेहरों में माने जाते हैं। विभाजन की स्थिति में वे मुलायम सिंह के साथ ही नजर आएंगे।


माता प्रसाद पांडे


सपा के वरिष्ठ नेता और फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष। खुले तौर पर अखिलेश सरकार के कामों की तरीफ करते हैं लेकिन विभाजन के मौके पर मुलायम खेमें में नजर आएंगे।


राजेन्द्र चौधरी


सपा के पुराने नेता और कई सालों तक प्रवक्ता का पद संभालने वाले राजेन्द्र चौधरी। पहले मुलायम और अब अखिलेश के खास। विभाजन के बाद साफ तौर पर अखिलेश के साथ नजर आएंगे।


अहमद हसन


कभी मुलायम के प्रति वफादार रहे अहमद हसन अब अखिलेश के खासमखास हैं। सपा टूटती है तो वे मुलायम की जगह अखिलेश का दामन थाम सकते हैं।


बलराम यादव


बलराम यादव भी मुलायम सिंह यादव के खास रहे हैं। कौएद के सपा में विलय को लेकर अखिलेश ने उन्हें कैबिनेट से रुखसत कर दिया था लेकिन बाद में वापसी भी की। उनके बेटे संग्राम सिंह यादव अखिलेश टीम का हिस्सा हैं। पार्टी टूटी तो बलराम को तय करना मुश्किल होगा कि वे किधर जाएं बेटे के दबाव में पिता भी अखिलेश की टीम का हिस्सा बन सकते हैं।


जया बच्चन


सपा की कद्दावर महिला सांसद जया बच्चन की अमर सिंह से नहीं बनती। अमर सिंह की वापसी के बाद मुलायम सिंह की टीम का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगी।


गायत्री प्रजापति


अखिलेश कैबिनेट के सबसे विवादित मंत्री रहे गायत्री प्रजापति। मुलायम सिंह के दखल के बाद उनकी कैबिनेट में दोबारा वापसी हुई थी। सपा टूटती है तो वे मुलायम खेमे में नजर आएंगे।


नरेश अग्रवाल


राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर वे पार्टी बदलने में माहिर इंसान हैं। फिलहाल उनकी नजदीकी रामगोपाल से ज्यादा है। जाहिर है कि सपा टूटी (और वे सपा में रहे) तो अखिलेश के खेमे में ही नजर आएंगे।


डिंपल यादव


सपा सांसद डिंपल यादव मुख्यमंत्री की अर्द्धांगिनी हैं। डिंपल तमाम कार्यक्रमों में अखिलेश के साथ नजर आती हैं। पार्टी टूटी तो वे अखिलेश के साथ ही नजर आएंगी।


धर्मेन्द्र यादव


सांसद धर्मेंद्र यादव मुलायम के भाई अभय राम के बेटे हैं। वह बदायूं से सांसद हैं। विवाद के दौरान अक्सर अखिलेश के साथ खड़े नजर आए। पार्टी टूटी तो वे अखिलेश के साथ जाएंगे।


अक्षय यादव


29 साल के अक्षय यादव राम गोपाल यादव के बेटे हैं। वह फिरोजाबाद से सांसद हैं। अरविंद सिंह यादव पर हुई शिवपाल की कार्रवाई के बाद अपनाए बगावती तेवर। अपने पिता रामगोपाल के साथ मजबूती के साथ खड़े। जाहिर है सपा टूटी तो वे अखिलेश की टीम का चेहरा होंगे।


तेज प्रताप यादव


27 साल के तेज मुलायम के पोते हैं। उनकी शादी लालू प्रसाद यादव की बेटी से हुई है। तेज प्रताप मैनपुरी से सांसद हैं। माना जाता है कि मुलायम मैनपुरी से प्रतीक को सांसद बनाना चाहते थे, लेकिन अखिलेश की जिद की वजह से ऐसा हो न सका। तेज प्रताप भी अखिलेश यादव के मुरीद।


रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया


राजा भैया सूबे के ठाकुर वोटों में मजबूत पकड़ रखते हैं जिसकी बदौलत ही मंत्री पद बना हुआ है। अखिलेश यादव से उनकी कभी नहीं पटी। पार्टी टूटती है तो वे मुलायम सिंह यादव के साथ ही जाएंगे।

Published on:
30 Dec 2016 09:46 pm
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