वह लोकसभा चुनाव लडऩा चाहता था।
लखनऊ. मुन्ना बजरंग काफी महत्वाकांक्षी था, वह राजनीति में आने के लिए अपना हाथ-पैर मार रहा था और जौनपुर से सांसद का चुनाव लडऩे की भी घोषणा कर दी थी। शायद उसकी यही घोषण उसके जान की दुश्मन बन गई और उसके विरोधियों ने उसको मरवा डाला। मॉफिया से माननीय बनना आज कोई नहीं बात नहीं है। यह दौर काफी पुराना है। राजनीति में आज ऐसे तमाम नेता हैं जिनका बड़ा आपराधिक रिकार्ड रहा है लेकिन आज वे विधायक और सांसद बन गए हैं, कई तो मंत्री भी बन गए हैं। एक दौर ऐसा चला था जब कई लोग क्राइम कर आसानी से राजनीति में आ जाते थे यह दौर अभी थमा नहीं है हां इस पर थोड़ा अंकुश जरूर लगा है वह भी इसलिए कि कई पार्टियां ऐसे लोगों को टिकट देना पसंद नहीं करती हैं।
हत्या की डिल 10 करोड़ में तय हुई थी
पूर्वांचल के माफिया डान मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हुई हत्या के पीछे शायद उसके चुनाव लडऩे की घोषणा कारण हो सकती है। मुन्ना बजरंगी की हत्या प्री प्लांड तरीके से की गई। माना जा रहा है कि उसकी हत्या की डिल 10 करोड़ में तय हुई थी। मुन्ना बजरंगी ने जौनपुर से चुनाव लडऩे की घोषणा कर दी थी इसके बाद से ही मुन्ना के विरोध सक्रिय हो गए थे और मुन्ना को ठिकाने लगाने के लिए शायद प्लान बना लिया। सोमवार को मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मार कर हत्या कर दी गई।
हार तो शायद इन्हें देखा भी नहीं है
पूर्वांचल में कुछ नेता ऐसे हैं जिनका अपराधिक रिकार्ड रहा और बाद में वे विधायक, सांसद और मंत्री भी बने। हरिशंकर तिवारी, मुख्तार अंसारी, अमरमणि त्रिपाठी, राजा भैया समेत कई ऐसे नाम हैं, जिनका एक ऐसा ही नाम है। जिनका अपराधिक रिकार्ड है और वे आज बाहुबली कहलाते हैं। सबसे बड़ी बात यह भी है कि ये जो भी चुनाव लड़ते हैं जितते ही हैं, हार तो शायद इन्हें देखा भी नहीं है। इनके इलाके में मानों इनकी तूती बोलती है। शायद यही देख कर मुन्ना बजरंगी ने भी राजनीति में आने की घोषणा कर दी थी।