
इको गार्डन में हाईवोल्टेज ड्रामा, योगी के भेष में प्रदर्शनकारी पहुंचे, अभिजीत दीपके का विरोध (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Eco Garden Lucknow Student Protest: राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में शुक्रवार को पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और लंबित भर्तियों के विरोध में आयोजित छात्र आंदोलन के दौरान कई दिलचस्प और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिले। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भेष धारण किए एक प्रदर्शनकारी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, वहीं दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद आंदोलन के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आ गए।
दिनभर चले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थी और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने अपने-अपने मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की। इको गार्डन में सुबह से ही छात्रों का जमावड़ा शुरू हो गया था। यूपीएसआई, लेखपाल भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जिलों से लखनऊ पहुंचे थे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और युवाओं को समय पर रोजगार उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज उठाना था।
प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा एक युवकों की रही, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भेष में इको गार्डन पहुंचे। प्रदर्शनकारी ने भगवा वस्त्र पहन रखे थे और मुख्यमंत्री की शैली में लोगों के बीच घूमते दिखाई दिए। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों और मीडिया कर्मियों का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो गया।
प्रदर्शनकारी का कहना था कि यह विरोध का एक प्रतीकात्मक तरीका है, जिसके माध्यम से वे सरकार तक युवाओं की समस्याएं पहुंचाना चाहते हैं। कुछ देर तक प्रदर्शनकारी आंदोलन का हिस्सा बना रहा और छात्रों के साथ संवाद भी करते दिखाई दिए। उनकी मौजूदगी से प्रदर्शन स्थल पर उत्सुकता का माहौल बना रहा।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी दोपहर बाद इको गार्डन पहुंचे। उनके आने की पहले से घोषणा की गई थी, जिसके चलते कई लोग उनके संबोधन का इंतजार कर रहे थे। हालांकि अभिजीत दीपके धरना स्थल पर ज्यादा समय तक नहीं रुके।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह करीब 20 मिनट तक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कुछ छात्रों और समर्थकों से बातचीत की। इसके बाद वह पुलिस अधिकारियों के साथ वहां से रवाना हो गए। उनके अचानक चले जाने को लेकर प्रदर्शनकारियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रहीं।
अभिजीत दीपके के पहुंचने के बाद आंदोलन के भीतर मतभेद भी सामने आने लगे। इको गार्डन में मौजूद बड़ी संख्या में यूपीएसआई और लेखपाल भर्ती के अभ्यर्थियों ने उनके खिलाफ नाराजगी जाहिर की। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि उनका आंदोलन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।
प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, वाराणसी और अन्य जिलों से आए अभ्यर्थियों का आरोप था कि कुछ लोग आंदोलन को मूल मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना था कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों के खिलाफ उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक मंच का हिस्सा नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है।
इको गार्डन में एग्जामपुर कोचिंग के संस्थापक विवेक के साथ भी बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे। उनके आस पास अभ्यर्थियों का बड़ा समूह दिखाई दिया, जो भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहा था। कई छात्रों ने मंच से अपनी समस्याएं रखीं और भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही देरी, परीक्षा परिणामों में विलंब तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर चिंता जताई। छात्रों का कहना था कि वर्षों की मेहनत के बाद भी उन्हें लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
हालांकि आंदोलन के दौरान कई तरह के घटनाक्रम सामने आए, लेकिन केंद्र में छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगें ही रहीं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध बनाया जाए, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों को कठोर सजा दी जाए।
छात्रों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली गड़बड़ियां युवाओं का मनोबल तोड़ रही हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों को पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
प्रदर्शन को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इको गार्डन और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी करते रहे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया और सभी को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता दी गई। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए गए।
इको गार्डन में शुक्रवार को हुआ यह प्रदर्शन केवल एक धरना नहीं बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं की चिंताओं और उम्मीदों का प्रतीक बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री के भेष में पहुंचे प्रदर्शनकारियों से लेकर अभिजीत दीपके की संक्षिप्त मौजूदगी और छात्रों के भीतर उभरे मतभेद तक, दिनभर कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी रहीं।
हालांकि आंदोलन के स्वर अलग-अलग दिखाई दिए, लेकिन सभी की मूल चिंता शिक्षा, रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर ही रही। अब युवाओं की निगाहें सरकार और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं कि उनकी मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
Published on:
12 Jun 2026 06:16 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
