
करिश्मा लालवानी
लखनऊ. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का सोमवार यानि कि २५ दिसम्बर को ९३वां जन्मदिन मनाया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें बधाई दी। लेकिन बधाईयों का तांता सिर्फ राजनीतिक दल तक ही सीमित नहीं है। 'गरम मसाला', 'वन टू थ्री', 'ट्रैफिक सिग्नल' जैसी फिल्मों में एक्ट करने वाली एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने भी उन्हें कुछ अलग अंदाज में विश किया। उनके मुताबिक वाजपेयी सिर्फ नेता नहीं बल्कि अपनेआप में एक अटल पर्सनालिटी हैं। वे उन कविताओं के प्रतीक हैं, जिन्होंने अपनी बेहतरीन कविताओं से दुनिया को प्रेरित किया है। एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिन के कार्यक्रम में उनकी कुछ कविताएं पढ़ने के लिए उन्हें आमंत्रित किया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में कविताएं पढ़ना गर्व की बात है।
इस दौरान लखनऊ आईं एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने पत्रिका को दिए इंटरव्य़ू में अटल जी से और अपने करियर से जुड़ी बातें बयां कीं।
सवाल- अटल जी से आप कितनी इंस्पायर्ड हैं?
जवाब- अटल जी की सोच, उनके विचार, उनके थॉट प्रोसेस अटल है। उनकी कविताएं प्रेरित करती हैं। उनकी दो कविताएं 'कदम मिला कर चलना होगा' और 'सर कटा सकते हैं मगर हम सर झुका नहीं सकते' इंस्पायर करती हैं। इंस्पायर इसलिए क्योंकि ये कहीं न कहीं सच्चाई को बयां करती हैं। खास तौर ये पोयम्स यूथ के लिए प्रेरणादासक हैं। आज का यूथ आइकन अगर यूनाइट होकर चले, तो देश की प्रगति के लिहाज से कुछ भी करना नामुृमकिन नहीं होगा। अटल जी की पोयम्स मन में विश्वास पैदा करती हैं कि कठिनाई चाहे जो हो और जैसी भी हो, जीतने का रास्ता आपको खुद निकालना होगा। इस तरह के इंस्पिरेशनल वर्डस लड़के और लड़की के भेदभाव से कहीं बढ़कर है। उनके जन्मदिन पर मैं यही दुआ करूंगी कि वो हमारे समक्ष रहें और उनकी हेल्थ बनी रहे।
सवाल- अटल जी की कौन सी पोयम आपकी फेवरेट है?
जवाब- कदम मिला के चलना और सर कटा सकते हैं मगर झुका नहीं सकते, अटल जी की ये दो कविताएं मेरी पर्सनल फेवरेट हैं। मुझे लगता है कि अटल जी की कविताएं मेरी जिंदगी की कहानी को बयां करती हैं। मैं बिहार से आई हुई पहली एक्ट्रेस और प्रोडयूसर हूं, जो बिहार के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड ले कर आई लास्ट इयर। ये सारी चीजें हासिल करना या मैं जिस मुकाम पर हूं वहां तक पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन खुद पर विश्वास कर मैनें कर दिखाया। मैं एक कंजरवेटिव जॉइंट फैमिली से आती हूं। मुझे क्या दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा ये मैं जानती थी, लेकिन मुझे ये भी पता था कि अपनी लड़ाई लड़ कर ही मुझे आगे बढ़ना है। लोगों को लगता है कि एक्ट्रेस को करना ही क्या होता है। तैयार हो और निकलो। लेकिन खुद को अच्छा दिखाने के लिए हम एक्ट्रेसेस घंटो जिम में वर्कआउट करती हैं। हमें तो ये भी याद नहीं होता कि कब ढंग से अच्छा खाना खाया हो। ये सारी मेहनत सिर्फ हमारी फिटनेस डिफआइन नहीं करती बल्कि खुद में एक लड़ाई है, एक जुनून है। मुझे लगता है कि अटल जी की पोयम्स मेरी लाइफ को डिफाइऩ करती हैं।
सवाल- पहले की तुलना में अब लड़कियों के स्पोर्टस में आने को लेकर लोगों की सोच में काफी बदलाव आए हैं। एक एक्टिव स्पोर्टस पर्सनालिटी होने के तौर पर आपके क्या विचार हैं?
जवाब- यूपी जैसे स्टेट में स्पोेर्टस की उतना फेसेलिटीज पहले नहीं थी जितना कि अब है। पहले से अब लोगों का माइंडसेट भी चेंज हो रहा है। मैने तो इंडिया को नेशनल लेवल पर रिप्रेजेंट किया है। लेकिन तब भी उस समय लोगों को लगता था कि स्पोर्टस की फील्ड लड़कों के लिए बनी है। लेकिन अब इस परसेप्शन में बदलाव आया है। क्रिकेट फील्ड में अपना सिक्का जमाने वाली मिताली राज एस बात का लेटेस्ट और बेस्ट एक्जामपल हैं कि बुलंद इरादे हों, तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता फिर वो चाहे लड़का हो या लड़की। सिर्फ मिताली ही नहीं बल्कि सान्या मिर्जा, साइना नेहवाल समेत कई लेडीज हैं, जिनहोंने मेन्स की दुनिया में अपना नाम कमाया है। ये आइकन हैं और हर कोई इनसे इंसपिरेशन हैं। रिसेंट टाइम्स में मैने कई पेरेंट्स को कहते सुना है कि लड़कियां ज्यादा अच्छे से ध्यान देती हैं। मुझे लगता है कि उनको रियलाइज हो गया है कि लड़का और लड़की में बैलेंस बना कर चलना होगा। इसलिए रूट लेवल से पेरेंट्स ने लड़कियों का साथ देना शुरू कर दिया है।
सवाल- तो क्या आपको लगता है कि कहीं न कहीं फिल्मस लोगों को इंस्पायर करती हैं?
जवाब- हां बेशक फल्मों का पॉजिटिव इफेक्ट माइंड पर पड़ता है। फिल्में हमेशा सोसाइटी को इंस्पायर करती हैं। इसलिए मैनें भुजपुरी फिल्में करना स्टार्ट कीं क्योंकि मैं अपने रूट्स से जुड़ी रहना पसंद करती हूं। इन फिल्मों के जरीये लोगों की जो सोच है, उसमें भी बदलाव आया है कि लैंग्वेज चाहे जो भी हो, आपका काम आपको पहचान दिलाता है।
सवाल- इस्टैब्लिश्ड एक्ट्रेस होने का बावजूद आपने कभी खान स्टारर फिल्मों में काम नहीं किया?
जवाब- मेरी तमन्ना जरूर है लेकिन बॉलीवुड में अपना मार्क इस्टैब्लिश्ड करने के लिए खान स्टारर फिल्मों में होना जरूरी नहीं है। कंगना रनौत आज एक जाना माना नाम हैं लेकिन उन्होंने आज तक किसी खान के साथ काम नहीं किया। उनकी कुछ फिल्में बॉक्स आफिस पर फ्लॉप भी रहीं बट ऐट दी एंड उन्होंने खुद को साबित किया। तो मुझे लगता है कि आपका काम आपकी पहचान होता है। मुझे भी खान फिल्मों के ऑफर आए थे लेकिन किसी वजह से मैं नहीं कर पाई। मैं १७ सील की उम्र से काम कर रही हूं। मैं आज जिस उम्र के पड़ाव हूं, उस एज में लोग आज अपना करियर स्टार्ट करते हैं। तो मुझे लगता है कि कम उम्र में जो मैने अचीव किया है, वो कई एक्ट्रस ने ४-५ बड़े बैनर की फिल्में करने के बाद भी अचीव नहीं किया।
सवाल- लखनऊ से आपका कितना जुड़ाव है?
जवाब- लखनऊ मेरा दूसरा घर है। मैं यहीं पली बढ़ी हूं। मेरी मासी यहां रहती हैं, तो मैं यहां के कल्चर से अच्छी तरह वाकिफ हूं और यहां की तहजीब ही है, जो मुझे बेहद पसंद है।