एक राष्ट्र एक चुनाव पर पंचायती राज निदेशालय में हुई संघोष्ठी, वक्तों ने रखें अपने विचार।
लखनऊ. देश में एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी सेवा संस्थान और गंगा सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में एक संघोष्ठी का पंचायतीराज निदेशालय के ऑडिटोरियम में आयोजन हुआ। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता भाजपा की सांसद मीनाक्षी लेखी, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्य्क्ष जस्टिस बी.एस कोकजे, रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी संस्थान के निदेशक रविन्द्र साठे रहे।
कार्यक्रम में बोलते हुए रविन्द्र साठे ने अपनी संस्था के विषय में बताते हुए कहा कि रामभाऊ म्हालगी एक आदर्श जनप्रतिनिधि थे। उनकी इच्छा थी कि जो राजनीती में है उनको प्रशिक्षित किया जाये। 1982 में इस संस्थान की स्थापना हुई जिसका उद्देश्य है राजनीतिक, और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वालो को प्रशिक्षित करना। इसके अतिरिक्त हमारी संस्था प्रबोधन यानी रिसर्च का काम भी करती है। प्रधानमंत्री ने तीन कामो को बढ़ावा दिया जिसमे एक देश एक राष्ट्र की अवधारणा सबसे प्रमुख है। इसी अवधारणा से प्रेरित होकर हमने मुम्बई एक संघोष्ठी की थी जिसमे पूरे देश से करीब 250 से लोग आये थे। जिसके बाद ये तय किया गया था कि इस विषय को लेकर हम पूरे देश मे जायेंगे।
इस देश में एक साथ चुनाव हो, यह कोई नई बात नहीं-
विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष बी.एस कोकजे ने कहा कि ये कोई नई बात नही है कि इस देश में एक साथ चुनाव हो। इससे पहले 1967 तक एक साथ चुनाव हुए है। आज ये बात इस देश का दुर्भाग्य है कि पूरे साल देश मे कहीं न कही चुनाव होते ही रहते है। जिसके चलते हर राजनीतिक दल को पूरे साल चुनाव के मूड में रहना पड़ता है लिहाजा सरकारें वो सख्त निर्णय नही ले पाती है जो इसे देश के विकास के लिए जरूरी है क्योंकि सख्त निर्णयों के परिणाम आने में समय लगता है। इसलिए ये जरूरी है कि एक स्थायी सरकार के लिए एक राष्ट्र एक चुनाव की अवधारणा को स्वीकार किया जाये।
बीजेपी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने दिया बयान-
नई दिल्ली से बीजेपी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि हमे व्यवस्था परिवर्तन के लिए 2014 में चुना गया था और राजनीति व्यवस्था की सबसे बड़ीकमी है कि कोई न कोई नेता कहीँ न कही चुनाव में फंसा ही रहता है। हर साल करीब 4 महीने किसी न किसी चुनाव में बर्बाद होते है। बार-बार चुनाव होने से जनता हर चुनाव में सहभागिता नहीं करती जिसके चलते हम अपने कर्तव्य से विमुख होते है। लोकतंत्र का पहला उसूल है कि हर भारतीय चुनाव में सहभागी बने। पर जब-जब लोकसभा के पहले विधानसभा के चुनाव हुए वोट प्रतिशत लगातार गिरा इसके तुलना जब जब चुनाव एक साथ हुए वोट का प्रतिशत बढ़ा पाया गया।2014 में सबसे ज्यादा वोट पढ़ें पर इससे ज्यादा वोट 1967 में पड़े थे।
उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव की मांग सबसे पहले आडवाणी जी ने की थी अटल जी की सरकार में और ये हमारी 2014 के चुनावी घोषणा भी है। लेखी ने आगे कहा कि पूरे देश मे एक साथ चुनाव कराने पर लगभग 45 बिलियन खर्चा आएगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में खर्चा 35 विलयन आया था ।जबकि एक अकेले गुजरात के चुनाव में 3 बिलयन का खर्चा आया था।
इस मौके पर सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में काम करने वाली विभूतियों को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर भाजपा प्रवक्ता मनीष शुक्ल व भाजपा प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी कार्यक्रम के संयोजक मनोज त्रिपाठी मौजूद रहे।