
OP Rajbhar Jantar Mantar Protest Violence: जंतर-मंतर पर हुई झड़प और उसके बाद सामने आए हिंसा के घटनाक्रम को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को समझने की जरूरत है और यह मान लेना सही नहीं होगा कि वहां मौजूद छात्रों ने हिंसा को अंजाम दिया। राजभर के अनुसार, छात्र आंदोलन कर रहे थे, लेकिन हालात उस समय बिगड़े जब कुछ राजनीतिक लोग और उपद्रवी तत्व वहां पहुंच गए। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते झड़प, पत्थरबाजी तथा वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।
ओपी राजभर ने कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों की भूमिका और बाद में हुई हिंसा के बीच अंतर करना जरूरी है। उनके मुताबिक, छात्र अपनी बात रखने और आंदोलन के उद्देश्य से वहां पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों ने न तो गाड़ियों में तोड़फोड़ की और न ही पत्थरबाजी की। राजभर का कहना है कि हिंसा उस समय भड़की, जब कुछ ऐसे लोग घटनास्थल पर पहुंचे जिनका उद्देश्य आंदोलन को प्रभावित करना और माहौल को बिगाड़ना था।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन के दौरान यदि बाहरी और असामाजिक तत्व भीड़ में शामिल हो जाते हैं तो स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों और हिंसा फैलाने वालों की पहचान अलग-अलग तरीके से की जानी चाहिए। राजभर के बयान के बाद जंतर-मंतर की घटना को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
मंत्री ने अपने बयान में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि हिंसा की शुरुआत छात्रों की ओर से नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक लोग उपद्रवी तत्वों के साथ वहां पहुंचे, जिसके बाद स्थिति बदल गई। उनका कहना था कि आंदोलन के माहौल में बाहरी हस्तक्षेप होने से तनाव बढ़ा और फिर घटनाएं तेजी से आगे बढ़ीं।
राजभर के अनुसार, इसके बाद लाठीचार्ज, पत्थरबाजी और वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं हुईं। हालात बिगड़ने पर पुलिस को भी कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने संकेत दिया कि पूरे घटनाक्रम की जांच करते समय यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिंसा की शुरुआत किसने की और कौन लोग वास्तव में तोड़फोड़ तथा पत्थरबाजी में शामिल थे।
जंतर-मंतर पर स्थिति बिगड़ने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौती बन गया। राजभर ने कहा कि जब माहौल हिंसक हो गया और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने लगीं, तब पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। उनका मानना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निर्दोष और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गलत तरीके से जिम्मेदार न ठहराया जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। लेकिन अगर आंदोलन की आड़ में हिंसा और तोड़फोड़ होती है, तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि असली उपद्रवियों की पहचान की जाए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को उनसे अलग रखा जाए।
ओपी राजभर के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम को एक ही नजरिए से देखने के बजाय निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद सभी लोगों को हिंसा के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और हिंसा बाद में बाहरी तत्वों के आने के बाद हुई, तो जांच में यह तथ्य सामने आना चाहिए।
राजभर ने कहा कि पुलिस और प्रशासन को घटनास्थल के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा फैलाने वाले लोग कौन थे और किन परिस्थितियों में हालात नियंत्रण से बाहर गए।
मंत्री के इस बयान ने जंतर-मंतर की घटना को लेकर राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे दी है। एक ओर जहां कानून-व्यवस्था और हिंसा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों की भूमिका पर भी बहस शुरू हो गई है। राजभर ने छात्रों को सीधे तौर पर हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय बाहरी उपद्रवी तत्वों और राजनीतिक हस्तक्षेप की ओर इशारा किया है।
उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन को हिंसा से अलग करके देखना जरूरी है। यदि कुछ लोग किसी आंदोलन की आड़ लेकर हिंसा फैलाते हैं, तो इसका दाग उन लोगों पर नहीं लगाया जाना चाहिए जो अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे।
जंतर-मंतर की घटना के बाद अब सबसे बड़ी नजर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की जांच में हिंसा के पीछे कौन लोग सामने आते हैं और किन परिस्थितियों में तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। ओपी राजभर के बयान ने साफ कर दिया है कि उनके अनुसार छात्रों और हिंसा फैलाने वाले तत्वों को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
मंत्री ने दोहराया कि छात्रों ने न तो गाड़ियां तोड़ीं और न ही पत्थर फेंके। उनके मुताबिक, राजनीतिक लोगों और उपद्रवी तत्वों के पहुंचने के बाद स्थिति बिगड़ी, जिसके परिणामस्वरूप झड़प, पत्थरबाजी और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी।