हम जरूरत है सोचने की समझने की अौर समाज के लिए जिम्मेदारी का कदम उठाने के लिए
लखनऊ. मरने के बाद जीवन क्या है, इस चिंता में पड़े लोग शायद इस बात पर कभी विचार भी नहीं करते कि उनका अपना शरीर कई दूसरी जिंदगी को भी बचा सकता है उन्हें नया जीवन दे सकता है। एक एेसा ही मामला सामने आया है जहां एक परिवार ने खून के रिश्तों के दायरों से आगे भी रिश्ते निभाने की सोची। मामला है राजधानी लखनऊ का जहां एक परिवार के कलेजे का टुकड़ा 24 साल का निवेश 26 दिनों से ट्रॉमा सेंटर में वेंटीलेटर पर जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा था माता पिता 26 दिन इस उम्मीद में रहे कि शायद उनका लड़का फिर से उठकर उन्हे पुकारेगा। पर ऊपर वाले का लिखा कुछ अौर ही था। तमाम कोशिशों के बाद भी वह नहीं बच सका। अौर अपने बेटे को दूसरों में जिंदा देखने के लिए मां-बाप ने अंगदान कर बेटे को पांच लोगों में जिंदा कर दिया। हम में से भी कुछ लोग एेसे भी है जो दूसरों को भी ज़िंदगी जीते हुए देखने की चाह रखते हैं उनमें से एक है निवेश का परिवार..
जानिए क्या है पूरा मामला
रायबरेली में दो जनवरी को बाइत फिल जाने के चलते निवेश गिर गया था अौर उसके सिर में चोट लगी थी। निवेश के मामा अविनाश के अनुसार निवेश अपनेरेस्टोरेंट से घर जाते समय एक गड्ढे से बचने के लिए निवेश ने जैसे ही ब्रेक लगाया, बाइक फिसल गई। निवेश को निजी अस्पताल में ले गया जहां से केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। उसे क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया था।
परिवार की सहमति से किया गया अंगदान
रविवार को डॉक्टरों के ब्रेन डेड घोषित करने के बाद निवेश के शरीर को शताब्दी लाया गया, जहां माता-पिता की सहमति से उसका लिवर, दोनों किडनी और दोनों कॉर्निया दान कराई गईं। उसके लिवर को रविवार को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दिल्ली भेजा गया।
काउंसलिंग कर अंगदान के लिए मनाया
वहीं केजीएमयू के ट्रांसप्लांट यूनिट के काउंसलर पीयूष व अश्विनी ने निवेश के घरवालों की काउंसलिंग कर अंगदान के लिए मनाया। परिवार को इस बात की तसल्ली है कि उसके अंगदान से पांच परिवार की खुशियां लौट आएंगी।
खुद में ही सिमटे, खुद में ही उलझे, खुद से ही जूझते, खुद को ही कोसते… यूं ही ज़िंदगी बिता देते हैं हम जरूरत है सोचने की समझने की अौर समाज के लिए जिम्मेदारी का कदम उठाने के लिए।