Pallavi Patel Youth Protest: लखनऊ में पल्लवी पटेल के नेतृत्व में हजारों छात्रों और कार्यकर्ताओं ने यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन में विधानसभा मार्च निकाला। प्रदर्शन में युवाओं ने शिक्षा और सामाजिक न्याय की मांग उठाई।
UGC Regulation Protest : यूजीसी रेगुलेशन को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Pallavi Patel के नेतृत्व में शनिवार को राजधानी लखनऊ में हजारों कार्यकर्ताओं, छात्र-छात्राओं और सामाजिक संगठनों ने विशाल पैदल मार्च निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। चारबाग रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ यह मार्च विधानसभा तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और यूजीसी रेगुलेशन को जल्द लागू करने की मांग उठाई। इस प्रदर्शन को पल्लवी पटेल की राजनीतिक ताकत और युवाओं के बीच बढ़ते प्रभाव के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सुबह से ही चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में कार्यकर्ताओं और छात्रों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथों में बैनर, पोस्टर और झंडे लिए प्रदर्शनकारी यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन में नारे लगा रहे थे। मार्च के दौरान “शिक्षा में अधिकार दो”, “युवाओं को न्याय दो” और “यूजीसी रेगुलेशन लागू करो” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे।
पल्लवी पटेल भी कार्यकर्ताओं के साथ पैदल मार्च में शामिल रहीं। उन्होंने रास्ते भर युवाओं और समर्थकों का अभिवादन किया और आंदोलन को शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत तरीके से आगे बढ़ाने का संदेश दिया। मार्च के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
विधानसभा पहुंचने के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए पल्लवी पटेल ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने की दिशा में लगातार बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। उनका कहना था कि यह केवल एक शैक्षिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल है।
पल्लवी पटेल ने कहा,“वंचित, पिछड़े और गरीब समाज को शिक्षा और अवसरों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। यूजीसी रेगुलेशन युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय के लिए बेहद जरूरी है।”उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं और पिछड़े वर्ग के हितों की बात करती है तो उसे इस रेगुलेशन को तुरंत लागू करना चाहिए।
अपने संबोधन में पल्लवी पटेल ने स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को केवल सड़क तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक यूजीसी रेगुलेशन पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। “हम सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक अपनी लड़ाई लड़ेंगे। यह लड़ाई युवाओं, छात्रों और वंचित समाज के सम्मान की लड़ाई है,” उन्होंने कहा। पल्लवी पटेल के इस बयान के बाद कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी कर उनका समर्थन किया।
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात युवाओं और छात्र-छात्राओं की बड़ी भागीदारी रही। राजधानी के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में छात्र संगठन और समर्थक पहुंचे थे। कई छात्रों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी रेगुलेशन जरूरी है। छात्रों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में कई बार वंचित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व और अवसर नहीं मिल पाते, इसलिए इस तरह के नियम लागू होना आवश्यक है।
विधानसभा मार्च को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। चारबाग से लेकर विधानसभा मार्ग तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कई जगह बैरिकेडिंग की गई और ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई। हालांकि प्रदर्शन के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ, जिससे लोगों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन में कई सामाजिक संगठनों और छात्र समूहों ने भी हिस्सा लिया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। कई संगठनों ने यूजीसी रेगुलेशन को युवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए इसे जल्द लागू करने की मांग की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यूजीसी रेगुलेशन का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है। यदि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता है तो यह युवाओं और छात्रों के बीच बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। पल्लवी पटेल पहले भी कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मुखर रही हैं। ऐसे में इस आंदोलन को उनके आगामी राजनीतिक अभियान के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सूत्रों का मानना है कि जिस तरह बड़ी संख्या में युवा और छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हुए, उससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस प्रदर्शन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
प्रदर्शन के अंत में पल्लवी पटेल ने कहा कि यह आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठित रहने और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की। फिलहाल राजधानी लखनऊ में हुआ यह विधानसभा मार्च प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और इसे युवाओं तथा सामाजिक न्याय के मुद्दे पर बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।