लखनऊ

2024 पर पत्रिका एनालिसिसः अखिलेश चुपचाप छोटी-छोटी पार्टियों संग क्या खिचड़ी पका रहे हैं?

Patrika Analysis on Akhilesh’s plan for 2024 election. समाजवादी पार्टी ने नीतीश कुमार की जनता दल यूनाईटेड के साथ गठबंधन का ऐलान किया हैं।

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Mar 14, 2023

लोकसभा 2024 का आम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ती जा रही है। एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी इस चुनाव में केंद्र और राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए अपना पूरा जोर लगाती दिख रही है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव केंद्र में UPA और NDA के इतर एक नया गठबंधन बनाने पर जोर दे रहे हैं।

छोटी पार्टियों को हां बड़ी को ना
अखिलेश यादव केंद्र में BJP और कांग्रेस के गठबंधन से इतर उन पार्टियों के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अपने-अपने राज्यों में इन दोनों पार्टियों को रोकने में सक्षम है। इसके लिए वह तेलंगाना के मुख्यमंत्री से हैदराबाद में मिले। यहां वह के. चन्द्रशेखर राव की ओर से 18 जनवरी को आंध्र प्रदेश के खम्म में आयोजित रैली में शामिल हुए। यहां उन्होंने सभी क्षेत्रीय दलों को साथ आकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने के संकेत द‌िए।


जानें कांग्रेस को न करने के पीछे रणनीति
जब कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा के समापन में अखिलेश यादव को आमंत्रित किया तो उन्होंने राहुल गांधी को बधाई तो दी, लेकिन कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इससे वह दूसरे क्षेत्रीय दलों को यह संदेश देना चाहते थे कि कांग्रेस के इतर भी तीसरा गठबंधन बनाया जा सकता है।

छोटे दलों के साथ गठबंधन में है सपा
इस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन में है। इसमें जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल, संजय चौहान की जन अधिकार पार्टी और पल्लवी पटेल की पार्टी अपना दल (क) शामिल हैं। इसके अलावा वह चन्द्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के साथ भी गठबंधन करने के विचार में हैं।


गठबंधन में सपा को फायदे से ज्यादा नुकसान
पिछले तीन चुनावों से लगातार छोटे--बड़े दलों से गठबंधन करने के बावजूद सपा को फायदे से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस तो 2019 के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन करने के बावजूद पार्टी को लोकसभा के 80 में से महज 5 सीटों पर ही जीत मिल पाई। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा, रालोद, अपना दल (क) और महान दल के साथ गठबंधन करने के बावजूद पार्टी चुनाव हार गई।

चुनाव दर चुनाव घटता-बढ़ता रहा वोट प्रतिशत
समाजवादी पार्टी का वोट प्रतिशत किसी चुनाव में बढा तो किसी चुनाव में बहुत तेजी से नीचे आ गया। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा को प्रदेश में 29.15% वोट मिले। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ 22.35% वोट ही मिल पाए। इसी तरह 2017 के विधानसभा चुनाव में 5 साल सरकार चलाने के बाद सपा को महज 21.81% ही वोट मिल पाए। इसके बाद 2019 के चुनावों में पार्टी को 2012 के बाद सबसे कम 18.11% वोट मिले। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी 32.06% वोट पाने में सफल हुई।


फिलहाल प्रदेश में नया गठबंधन नहीं करेगी सपा
अपने पूर्वांचल दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने किसी प्रकार का नया प्रयोग करने से मना कर दिया था। गाजीपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था, “अब पार्टी किसी भी प्रकार का नया गठबंधन नहीं करेगी, जो साथी हमारे साथ हैं, वही आगामी चुनाव में भी हमारे साथ रहेंगे। हमने बहुत सारे प्रयोग कर लिए, लेकिन अब कोई नया प्रयोग नहीं करेंगे। ”


तीसरे मोर्चे की तैयारी में जुटी सपा
2024 के आगामी लोकसभा चुनाव में उतरने से पहले सपा ने रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाइटेड के साथ गठबंधन का ऐलान किया। इसके तहत दोनों पार्टी मिलकर BJP को यूपी और बिहार में रोकेंगी। अभी इस गठबंधन में अलग-अलग प्रदेशों की अन्य क्षेत्रीय दलों के जुड़ने की भी संभावना है।

Published on:
14 Mar 2023 07:48 pm
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