
लखनऊ. पीएम मोदी ने अपनी मन की बात में कहा कि पशुओं के अपशिष्ट के इस्तेमाल की योजना को गोबरधन योजना नाम मिला है। गोबर और कचरे को आय का स्त्रोत भी बनाएं। इस ओर लखनऊ नगर निगम अपने कदम बढ़ा चुका है। राजधानी सबसे बड़ी गोशाला कान्हा उपवन में खाद बनाने का काम शुरू हो चुका है जबकि कूड़ा निस्तारण प्लांट पर कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगने का एमओयू भी इन्वेस्टर समिट में साइन किया जा चुका है। इससे अपशिष्ट के निस्तारण के साथ ही रोज़गार के अवसर भी पैदा होंगे।
मार्केट में जल्द ही
कान्हा उपवन में निर्मित होने वाली खाद को पहले चरण में पुष्प प्रदर्शनी में रखा गया है। भरपूर स्टॉक होने के बाद इसे मार्केट में भी उतारे जाने की तैयारी है। इसका मार्केट रेट 50 से 70 रुपये किलो तक रखा जा सकता है। शिवरी पलांट पर भी खाद उत्पाद होता है। यूपीडा से एक्सप्रेसवे के किराने प्लांटेशन के लिए यही से खाद ली जा रही है।
किसान और विभाग दोनों को फ़ायदा
बढते पेस्टिसाइड का इस्तेमाल ज़मीन और पौधे को खाने वाले दोनों के लिए ही हानिकारक है। ऐसे में कान्हा उपवन से निकलने वाली खाद से आस पास के किसानों और विभाग दोनों का ही फ़ायदा हो सकता है। हर दिन करीब 10 हजार किलो खाद बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह औसत कान्हा उपवन में मौजूद गायों के आधार पर निकाला गया है। दो हजार गायों के गोबर से करीब 10 हजार किलो खाद बनेगी। इस खाद से करीब दो हजार पैकेट बनेंगे। मौजूदा समय में कान्हा उपवन में कुल 4 हजार पशु हैं। हर गाय प्रतिदिन 5 किलो गोबर देती है। इसके चलते 10 हजार किलो खाद बनाने का लक्ष्य प्रतिदिन रखा गया है। इतनी खाद के लिए 2 हज़ार गाय पर्याप्त हैं।
इस तरह बनती है खाद
सबसे पहले गोबर को गोबर गैस में डाला जाता है। इसके बाद गैस से वेस्ट निकलता है, जिसकी मदद से वर्मी कंपोस्ट (उर्वरक) तैयार किया जाता है। इसके बाद इस कंपोस्ट का यूज गमलों में किया जा सकता है।