
लखनऊ. भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले अपना ऐसा ब्रम्हास्त्र चला, जिससे यूपी की सियायत गर्मा गई है। दरअसल मोदी सरकार ने पदोन्नति में आरक्षण देने का आदेश जारी कर दिया है, जिसे देश के सभी राज्यों में 15 जून से लागू करना है। मोदी सरकार के इस फैसले पर जहां समाजवादी पार्टी ने अभी तक कोई अधिकारिक बयान जारी नहीं किया, वहीं बसपा और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि बसपा के ने इतना जरूर कहा कि मायावती पहले से ही प्रमोशन में आरक्षण के पक्ष में खड़ी हैं। पर इस वक्त केंद्र सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से चुनावी है। वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले पर कर्मचारियों में भी दो फाड़ देखने को मिल रहा है। जगह-जगह सरकार के इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन भी हो रहा है।
पूरी तरह से चुनावी निर्णय
मेदी सरकार ने सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में आरक्षण देने का आदेश जारी कर दिया। देश की सभी राज्य सरकरों को 15 जून तक इस आदेश को अपने राज्यों में अमल में लाना है। पर सरकार के इस आदेश पर सियासत गर्मा गई है। राजनीतिक दलों के नेता खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे, पर इसे भाजपा की चुनावी चाल बता रहे हैं। कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने कहा कि चार साल तक मोदी सरकार ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। विपक्ष नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हमेशा मांग करता रहा है, पर 2019 से पहले मोदी सरकार ने यह निर्णय सिर्फ चुनाव को देखते हुए लिया है। जिसे देश की जनता अच्छे से जानती है।
अखिलेश से मांगा जवाब
केंद्र सरकार के आदेश के बाद बुधवार को लखनऊ में एससी वित्त एवं विकास निगम अध्यक्ष लालजी निर्मल ने प्रेस वार्ता के जरिए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव साफ करें कि वह प्रमोशन में आरक्षण के समर्थक हैं या विरोधी? उन्होंने कहा कि यूपी के लाखों दलित कर्मचारियों को अखिलेश यादव की सरकार ने रिवर्ट किया गया था। ऐसे में अखिलेश यादव अपनी स्थिति साफ करें। अगर वह प्रमोशन में आरक्षण के हिमायती हैं तो अपने पूर्व में उठाए गए कदम के लिए दलितों से माफी मांगे। लालजी निर्मल के बयान के बाद कई सपा नेताओं से इस पर राय मांगी गई तो सभी का कहना था कि इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बयान देंगे।
बसपा ने कहा ठीक कदम
प्रमोशन में आरक्षण को बसपा सुप्रीमो मायावती पहले से ही समर्थन दे रही हैं। उन्होंने पिछले दिनों मोदी सरकार पर जान-बूझकर प्रमोशन में आरक्षण न देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को दलित कर्मचारियों को यह फायदा देना चाहिए। बसपा सुप्रीमो ने उस वक्त कहा था कि एससी-एसटी वर्ग के कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा सही माना है। मायावती के बयान के बाद बसपा नेताओं का कहना है कि निर्णय तो ठीक है, लेकिल समय गलत चुना गया है। अगले साल चुनाव है और इतने कम समय में कोई भी राज्य सरकार इसे लागू नहीं कर सकती।
दो धड़ों में बंटे कर्मचारी
केंद्र सरकार के आदेश के बाद यूपी में राज्य कर्मचारियों दो हिस्से में बंटे हुए हैं। तमाम कर्मचारी संगठन पक्ष और विपक्ष में प्रदर्शन शुरू कर चुके हैं। इस फैसले के समर्थन में आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश ने पैदल मार्च निकाला और कहा कि जल्द ही पदोन्नति में आरक्षण का लाभ यूपी के दलित कर्मचारियों को दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो आरक्षण बचाओ विशाल महारैली होगी। वहीं दूसरी तरफ भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल 80 वर्षीय आरके दीक्षित की अध्यक्षता में सर्वजन हिताय संरक्षण समिति ने चेतावनी दौड़ निकाली और कहा कि किसी भी हाल में सरकार के इस फैसले को लागू नहीं होने देंगे।