
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो-Avanish Kumar)
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवारवाद और जातीय राजनीति को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब सरकार की प्राथमिकता अपना परिवार होता है, तब गरीब परिवारों की परेशानियां नीतियों से दूर हो जाती हैं। पूर्ववर्ती सरकार में लाखों माताएं और बहनें धुएं से भरी रसोई में खाना बनाने को मजबूर थीं। सीएम योगी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार ने लोक-कल्याण को प्राथमिकता दी। उन्होंने दीपावली के मौके पर गैस सिलेंडर रिफिल सब्सिडी और अयोध्या के दीपोत्सव को लेकर भी अपनी बात रखी।
मुख्यमंत्री ने दीपावली के मौके पर रसोई गैस सिलेंडर रिफिल सब्सिडी वितरण की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि लखनऊ में 1,500 करोड़ रुपये की धनराशि से प्रदेश के 1.89 करोड़ से अधिक पात्र परिवारों को गैस सिलेंडर रिफिल की सब्सिडी का वितरण होगा। सीएम योगी ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता साफ है। आर्थिक तंगी के कारण किसी गरीब परिवार को दोबारा धुएं वाले चूल्हे पर खाना बनाने के लिए मजबूर न होना पड़े। हर घर में दीपावली की खुशियां और हर रसोई में सुविधा का प्रकाश बना रहे।
उन्होंने मातृशक्ति और वंचित परिवारों की खुशियों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया। साथ ही सभी माताओं और बहनों को दीपावली की अग्रिम बधाई दी।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब सरकार की प्राथमिकता अपना ही परिवार हो, तो गरीब परिवारों की पीड़ा शासन की नीतियों से ओझल हो जाती है। उत्तर प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान यही स्थिति थी। परिवारवाद की राजनीति के बीच लाखों माताएं और बहनें धुएं से भरी रसोई में जीवन बिताने को विवश थीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने परिवारवाद के स्थान पर लोक-कल्याण को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों की रसोई तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाया गया। इससे महिलाओं को स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान मिला।
सीएम योगी ने अयोध्या के दीपोत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि जाति की जड़ता समाज को बांटती है, जबकि साझी आस्था और संस्कृति उसे एक सूत्र में पिरोती हैं। अयोध्या का दीपोत्सव इसी सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जातीय विभाजन को राजनीति का आधार बनाने वाली सरकारों ने समाज को जोड़ने वाली इस सांस्कृतिक शक्ति की पूरी तरह उपेक्षा की। डबल इंजन सरकार ने वर्ष 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत कर इस सोच को बदला और राम नगरी की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन के उत्सव में बदल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी मार्गदर्शन में आज धर्माचार्य, विद्यार्थी, स्वच्छताकर्मी, कुम्हार और व्यापारी सभी समान उत्साह और श्रद्धा से दीपोत्सव में शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पहचान जाति से नहीं, सहभागिता से होती है। दीप अलग-अलग हाथों में जलते हैं, लेकिन उनका प्रकाश पूरे समाज को एक करता है।
Updated on:
3 Nov 2026, 9:01 AM IST
Published on:
3 Nov 2026, 8:21 AM IST
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