
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव के निधन से राजनीतिक ही नहीं, बल्कि कारोबारी और फिटनेस जगत में भी शोक की लहर है। उन्होंने राजनीति की राह छोड़ अपनी मेहनत से फिटनेस और रियल एस्टेट के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई। लखनऊ में स्थापित उनका बिजनेस नेटवर्क, फिटनेस ब्रांड और समाजसेवा से जुड़ी पहलें आज भी उनकी सोच और मेहनत की मिसाल मानी जाती हैं।
प्रतीक यादव का जीवन इस बात का उदाहरण माना जाता है कि बड़े राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद कोई व्यक्ति अपनी अलग पहचान बना सकता है। जहां उनके लिए सक्रिय राजनीति में प्रवेश करना बेहद आसान माना जाता था। वहीं उन्होंने सार्वजनिक जीवन की राजनीतिक चमक से दूरी बनाकर व्यापार और फिटनेस की दुनिया में खुद को स्थापित किया।
साल 2014 में जब मुलायम सिंह यादव ने दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब यह चर्चा तेज थी कि खाली होने वाली सीटों में से किसी एक से प्रतीक यादव चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि अपना व्यवसाय और फिटनेस इंडस्ट्री है। इसी फैसले ने उन्हें राजनीतिक पहचान से अलग एक स्वतंत्र कारोबारी चेहरा बना दिया।
फिटनेस को लेकर उनका जुनून काफी चर्चित रहा। छात्र जीवन में अधिक वजन की समस्या से जूझने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह बदला और एक अनुशासित फिटनेस लाइफस्टाइल अपनाई। उनकी इस ट्रांसफॉर्मेशन ने युवाओं के बीच उन्हें प्रेरणा का प्रतीक बना दिया। लखनऊ में उन्होंने अत्याधुनिक सुविधाओं वाला बड़ा फिटनेस सेंटर स्थापित किया। जिसने शहर की फिटनेस संस्कृति को नई दिशा दी। उनकी फिटनेस यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली।
व्यापारिक क्षेत्र में भी प्रतीक यादव ने तेजी से अपनी जगह बनाई। रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट सेक्टर में उनके कई प्रोजेक्ट चर्चा में रहे। उन्होंने अपने काम को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखते हुए पेशेवर तरीके से आगे बढ़ाया। कारोबारी हलकों में उन्हें शांत स्वभाव, दूरदर्शी सोच और आधुनिक प्रबंधन शैली के लिए जाना जाता था।
उनकी पत्नी अर्पण के साथ मिलकर वे सामाजिक और पशु संरक्षण से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे। लखनऊ स्थित गोसेवा और पशु देखभाल से जुड़ी कई पहलों में उनका सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता था। स्ट्रीट डॉग्स और पशु कल्याण को लेकर भी वे लगातार काम करते रहे। प्रतीक यादव अपने पीछे केवल संपत्ति या कारोबार ही नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और अलग पहचान बनाने की प्रेरणादायक विरासत भी छोड़ गए हैं।