- हाईकोर्ट का आदेश- उत्तर प्रदेश की तर्ज पर करो पंजाब-हरियाणा से गैंगस्टर्स की सफाई- उप्र की कानून-व्यवस्था को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सराहा- योगी मॉडल को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सराहा
लखनऊ. यूपी पुलिस के ताबड़तोड़ एनकाउंटर भले ही विवादों में रहे हों लेकिन पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूपी की कानून-व्यवस्था की सराहना की है। कोर्ट का कहना है कि गैंगस्टर की सफाई के लिए यूपी की तर्ज पर कड़ा कानून बनाए जाने की जरूरत है। योगी सरकार की एनकाउंटर नीति पर संसद और सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा हुई थी।
क्या कहा कोर्ट ने
बढ़ते गैंग कल्चर पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब और हरियाणा को यूपी की तर्ज पर कड़ा कानून बनाने को कहा है। हाईकोर्ट ने दोनों राज्यों को छह माह में ऐसा कानून बनाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश सोमवार को जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि पंजाब और हरियाणा में इस तरह की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं जहां दो गुट आपसी रंजिश में एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं।
सरकारी उपलब्धियों में एनकाउंटर
योगी सरकार के शुरुआती 16 महीने में तीन हजार से ज्यादा एनकाउंटर हुए। मार्च 2017 से 2018 के बीच78 अपराधियों को मारा गया। 26 जनवरी 2019 को योगी सरकार ने एक आंकड़ा जारी किया था। इसमें बताया गया था कि इस अवधि में पुलिस ने 3026 मुठभेड़ें कीं। जिसमें 838 अपराधी घायल हुए। 11981 लोगों ने जमानत रद्द कराईं और अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। एसटीएफ के एनकाउंटर को गिनाते हुए कहा गया था कि एसटीएफ ने9 अपराधियों को मारा था और 139 को गिरफ्तार किया। इसी प्रकार एनएसए के तहत 3, गुंडा एक्ट के तहत 299 और अन्य 2589 मामलों में पुलिस कार्रवाई की गई। इसी तरह 1277 भू-माफियाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गयी।
सरकार की हुई थी किरकिरी
एनकाउंटर पर सरकारी उपलब्धि की सूची भी योगी सरकार ने जारी की थी। इस पर सपा-बसपा ने तब खूब आलोचना की थी। समाजवादी पार्टी का कहना था कि "योगी आदित्यनाथ सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के बजाय फर्जी मुठभेड़ कर रही है। कांग्रेस का आरोप था कि राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है। लेकिन सरकार हत्याओं पर जश्न मना रही है।
संसद और सुप्रीम कोर्ट में उठा था मामला
तब इस मामले को सपा ने संसद में भी उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इन मुठभेड़ों पर भी सवाल उठाए थे। मानवाधिकार आयोग तक मामला पहुंचा था।
यह है यूपी में व्यवस्था
गैंगस्टर्स और संगठित अपराध में लिप्त अपराधियों पर नकेल कसने के लिए उप्र में उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट 1986 लागू है। इसमें कई प्रावधान और विशेषाधिकार हैं। इस कानून के तहत कम से कम दो वर्ष और अधिक से अधिक आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। इस कानून के तहत गवाहों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रावधान है। ऐसे अपराधियों पर अलग से अदालत गठित कर उनके खिलाफ सुनवाई की जाती है।