लखनऊ

‘बंद मुट्ठी लाख की, खुली तो खाक की’, क्या इसकी अहमियत समझ पाएंगे राहुल-अखिलेश

UP Elections 2027: सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी ने 403 सीटों में से 100 से ज्यादा सीटों पर अपने कैंडीडेट्स के नाम भी लगभग फाइनल कर लिए हैं। कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का सोच रही है।
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Sep 23, 2026
Rahul Gandhi Akhilesh Yadav
अखिलेश यादव और राहुल गांधी (फाइल ANI)

Rahul Gandhi Akhilesh Yadav UP Elections 2027 Alliance: ‘बंद मुट्ठी लाख की, खुली तो खाक की’, अखिलेश यादव और राहुल गांधी, दोनों को ही यह समझना होगा। अगर उन्हें 2027 में योगी आदित्यनाथ को चुनौती देनी है। लेकिन जिस तरह के बयान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तरफ से आ रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि दोनों ही दल मुट्ठी खोलने को आतुर हैं। सरल शब्दों में कहें तो दोनों अपने बूते उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रहे हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में भीड़ उमड़ रही है। अखिलेश यादव की फैन फॉलोइंग भी बढ़ी है, लेकिन कांग्रेस या समाजवादी पार्टी का अपने दम पर सरकार बनाना, फिलहाल तो मुश्किल नजर आता है। बीजेपी के पास एक तरफ पीएम मोदी की लोकप्रियता है, तो दूसरी तरफ सीएम योगी की बुलडोजर बाबा की छवि। इसके अलावा, योगी के कार्यकाल में यूपी में काफी काम हुआ है। खासकर उत्तर प्रदेश ‘गुंडई’ राज्य का दाग धोने में कामयाब रहा है। ऐसे में राहुल या अखिलेश के लिए अकेले बीजेपी का सामना आसान नहीं होगा।

“मैं बेहतर” वाली मानसिकता

हां, दोनों साथ आते हैं, तो कुछ उम्मीद की जा सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी के इन लड़कों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। समाजवादी पार्टी ने 37 लोकसभा सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के 6 सांसद संसद पहुंचे। बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। उसने 75 सीटों पर उम्मीदवाद उतारे और जीते केवल 33। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला परिणाम रहा अयोध्या (फैजाबाद)। यहां समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत हासिल करके बीजेपी को मानसिक आघात पहुंचाया। अगर अखिलेश और राहुल उसी काम्बनैशन को विधानसभा चुनाव में भी कायम रखते हैं, तो परिणाम अच्छे भी रह सकते हैं। हालांकि, सामने आ रहे बयानों से प्रतीत होता है कि दोनों दल ‘मैं बेहतर’ वाली मानसिकता की चपेट में हैं।  

बयान पर पलटवार

SP सांसद इकरा हसन ने हाल में कहा कि कांग्रेस अकेले कुछ खास हासिल नहीं कर सकती और अखिलेश यादव यूपी में बीजेपी को हराने में सक्षम हैं। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी सांसद इमरान मसूद ने कहा - इकरा हसन भी अकेले यह नहीं कर सकतीं। इसमें क्या दिक्कत है? इकरा हमारी बच्ची हैं। वह हमारी भतीजी जैसी हैं। तृणमूल कांग्रेस के लोग भी बहुत कुछ कहा करते थे, देखिए बंगाल में क्या हुआ। आइए साथ मिलकर चलें। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने इकरा के दावे पर सवाल उठाते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में SP के प्रदर्शन की ओर इशारा किया। उदित राज ने कहा संभव है यह इकरा हसन का अपना बयान हो, लेकिन हम इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं: जब 2024 में गठबंधन बना, तो समाजवादी पार्टी ने 36 सीटें जीतीं। उससे पहले उसका प्रदर्शन कैसा था? 2019 में समाजवादी पार्टी के पास केवल छह सांसद थे। इसलिए, राजनीति में एक और एक हमेशा दो नहीं होते; एक और एक ग्यारह भी हो सकते हैं।

2024 वाली वाइब नहीं?

सपा सांसद के बयान पर कांग्रेस नेताओं के पलटवार से यही समझ आता है कि, दोनों दलों की वाइब 2024 वाली नहीं है। भले ही अभी चुनाव में समय है, लेकिन इस तरह के बयान शंका-आशंकाओं को जन्म देते हैं और इससे फैसले प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है। खासकर सीट शेयरिंग पर इसका असर पड़ सकता है। राहुल को मिल रहे युवाओं के समर्थन के आधार पर कांग्रेस ज्यादा सीटों की मांग कर सकती है। वहीं, अगर अखिलेश यादव अपनी सांसद इकरा हसन की सोच से इत्तेफाक रखते हैं, तो कांग्रेस की मांग पर ऐतराज जता सकते हैं और पेंच फंस सकता है।

सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी ने 403 सीटों में से 100 से ज्यादा सीटों पर अपने कैंडीडेट्स के नाम भी लगभग फाइनल कर लिए हैं। कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का सोच रही है। कुल मिलाकर चुनाव से पहले विपक्ष के घर में जमकर बर्तन खटकने की पूरी संभावना है। अब बस ये देखना है कि राहुल और अखिलेश बंद मुट्ठी की अहमियत समझ पाते हैं या नहीं।

Updated on:
23 Sept 2026 07:17 pm
Published on:
23 Sept 2026 07:17 pm
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