Rahul Gandhi Statement On PM Modi : राहुल गांधी लखनऊ पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी के संविधान सम्मेलन में हिस्सा लिया।
लखनऊ : राहुल गांधी ने लखनऊ में कांग्रेस पार्टी के संविधान सम्मेलन में हिस्सा लिया। राहुल गांधी इस दौरान कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कुछ कमियां थीं तभी कांशीराम सफल हो पाए अगर वह कमियां न होती तो कांशीराम कभी भी सफल नहीं हो पाते।
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने दलित वोटर्स को रिझाने के लिए कांशीराम, आंबेडकर और ज्योतिबा फुले और सावित्री फुले की जमकर सराहना की। राहुल गांधी एपिस्टीन फाइल, भारत अमेरिका ट्रेड डील और अड़ानी जैसे मुद्दों पर जमकर हमलावर भी रहे।
राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी अब साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। वह अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे हैं। वह अमेरिका के आदमी हैं। यहीं बात जब मैं संसद में बोलने जा रहा था तो नरेंद्र मोदी भाग खड़े हुए थे। मैंने पार्लियामेंट में एपिस्टीन का शब्द बोला तो स्पीकर साहब बोले नहीं…नहीं।
मैंने कहा कि हमारी एनर्जी सिक्योरिटी कंप्रोमाइज क्यों हुई? अमेरिका बोलेगा- रूस से तेल नहीं खरीदना है तो हम नहीं खरीदेंगे…ईरान से नहीं खरीदना तो हम ईरान से नहीं खरीदेंगे। लेकिन ऐसा क्यों? राहुल गांधी ने ऑयल मिनिस्टर हरदीप पुरी पहला कंप्रोमाइज्ड व्यक्ति बताया, उनका कहना है कि हरदीप पुरी एपिस्टीन के दोस्त हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा कि हरदीप पुरी की बेटी कंपनी में जार्ज सोरेस की फंडिंग है।
राहुल गांधी ने कहा- नरेंद्र मोदी ने अपना पूरा का पूरा धन अड़ाणी को नहीं दिया। वह सब बीजेपी का ही है। बीजेपी का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर अडाणी कंपनी में है। इस बात को अमेरिका ने समझ लिया है। तभी अड़ाणी पर अमेरिका में केस हुआ। वो केस अड़ाणी पर नहीं है वह मोदी जी पर है और वह केस प्रधानमंत्री मोदी को मैसेज है कि अगर आपने हमारी बात नहीं सुनी तो हम आपका पूरा का पूरा सिस्टम खोल देंगे और दुनिया को दिखा देंगे। तो अब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे हैं। वह अमेरिका के आदमी हैं। यह बात मैं संसद में कहने जा रहा था वह भागकर निकल गए। वह मेरी आंख से आंख नहीं मिला सकते।
राहुल गांधी आगे बोले- मैं हर बात का आपको सबूत दूंगा। अब आप समझिए भारत का कोई भी प्रधानमंत्री कृषि क्षेत्र किसी दूसरे देश के लिए नहीं खोल सकता। 4 महीने तक प्रधानमंत्री ने वह डील नहीं मानी। वह ऐसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया, वह भी बिना कैबिनेट के डिस्कस के?