लखनऊ

राहुल गांधी को बड़ी राहत: अमित शाह मानहानि केस में ‘वॉयस सैंपल’ की अर्जी कोर्ट ने की खारिज

MP MLA Court: एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी की आवाज जांच की मांग को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में अब 11 मई को अगली सुनवाई होगी।
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May 02, 2026
rahul gandhi
राहुल गांधी (X/@RahulGandhi)

Rahul Gandhi Amit Shah: गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली है। शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके आवाज के नमूने की जांच कराने की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि परिवादी की ओर से दी गई अर्जी में कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके चलते इसे निराधार मानते हुए अस्वीकार कर दिया गया। इस फैसले के बाद मामले की दिशा अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर केंद्रित हो गई है।

बहस और जमानत पर रहेगा फोकस

कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है। इस दिन अदालत में अंतिम बहस के साथ-साथ जमानत नामा पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। अब इस आदेश के बाद साफ हो गया है कि अदालत बिना पर्याप्त साक्ष्यों के किसी भी तकनीकी जांच को मंजूरी नहीं देगी।

2018 की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला वर्ष 2018 से जुड़ा है, जब कोतवाली देहात क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के एक बयान को लेकर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि राहुल गांधी ने उस समय अमित शाह के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन है और लगातार सुनवाई जारी है।

आवाज जांच की मांग पर कोर्ट का सख्त रुख

सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष ने राहुल गांधी की आवाज के नमूने की जांच और उसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला में मिलान कराने की मांग की थी। लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए पहले से तय प्रक्रिया के अनुसार ही कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया है। अब इस केस में अगला चरण अंतिम बहस और कानूनी दलीलों का होगा, जिससे यह तय होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

फैसले के बाद बढ़ी सियासी हलचल

अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राहुल गांधी और अमित शाह से जुड़े इस मामले पर सभी की नजरें अब 11 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अंतिम बहस के दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें मजबूती से पेश करेंगे। माना जा रहा है कि इस केस का आगामी चरण न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिससे भविष्य की रणनीतियों पर असर पड़ने की संभावना है।

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