22 मार्च से नवरात्रि शुरू हो रही है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने रामचरितमानस पर एक बड़ा दांव खेल दिया है, जिससे विपक्षी दल चित हो गए हैं। न खुलकर विरोध कर पाए रहे हैं और न ही समर्थन।
रामचरितमानस विवाद के ठीक बाद अब सीएम योगी ने 'राम-पॉलिटिक्स' का दांव चला है। योगी का दांव ऐसा है कि जिस सपा के नेता ने रामचरितमानस को लेकर विवाद खड़ा किया था, उस पार्टी के सामने भी फैसले का स्वागत करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
सीएम योगी ने रामचरितमानस पर चला दांव
दरअसल, चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू हो रही है और रामनवमी 30 मार्च को मनाई जाएगी। योगी सरकार ने चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिरों में दुर्गा सप्तशती और अखंड रामायण पाठ सहित विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को शासन की तरफ से एक लाख रुपये दिए जाएंगे।
त्योहारों को मनाने के लिए 10 करोड़ रूपए दे योगी सरकार
योगी के राम पॉलिटिक्स के दांव पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेचैनी बढ़ गई। अखिलेश यादव खुलकर विरोध नहीं कर पाए रहे हैं। उन्होंने इस फैसले का व्यंग्यात्मक लहजे में स्वागत किया। मंगलवार को उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, ''रामनवमी मनाने के लिए उत्तर प्रदेश के जिलाधिकारियों को एक लाख रुपये दिये जाने के प्रस्ताव का स्वागत है, पर इतनी कम रकम से होगा क्या? कम से कम 10 करोड़ देने चाहिए। जिससे सभी धर्मों के त्योहारों को मनाया जा सके। भाजपा सरकार त्योहारों पर मुफ्त सिलेंडर दे और इसकी शुरुआत इसी रामनवमी से हो।”
स्वामी प्रसाद ने रामचरितमानस को बताया था बकवास ग्रंथ
बीते दिनों सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस विवाद को लेकर चर्चा में थे। उन्होंने न सिर्फ रामचरितमानस को बकवास बताया था, बल्कि प्रतिबंधित करने की मांग भी सरकार से कर दी थी। इसको लेकर यूपी में जमकर बवाल मचा था। संतों-महंतों ने स्वामी प्रसाद पर सख्त ऐक्शन लेने के लिए अखिलेश पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।
रामचरितमानस पर विवाद इतना विवाद बढ़ गया था कि इस मुद्दे को लेकर सपा के नेताओं में दो गुट बन गए थे। सपा के अंदरखाने में मौर्य का विरोध होने लगा। हर कोई बाहर बोलने से बचने लगा। जो नेता इस मुद्दे पर मुखर होकर बोले, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया।
अखिलेश ने दिया था स्वामी मौर्य का साथ
सपा के कई नेता चाहते थे कि अखिलेश यादव स्वामी प्रसाद मौर्य पर ऐक्शन ले, लेकिन उल्टा हुआ। पार्टी ने स्वामी मौर्य को प्रमोशन देते हुए महासचिव बना दिया। यह ऐसा पद है, जिस पर अखिलेश के चाचा शिवपाल भी नियुक्त किए गए हैं। इसे रामचरितमानस विवाद पर अखिलेश का जवाब भी माना गया और कहा गया कि सपा मुखिया ने स्वामी प्रसाद मौर्य का साथ दिया है।
उन्होंने खुलकर मौर्य के बयान का विरोध नहीं किया, बल्कि योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी कि वह विवादित चौपाई सदन में पढ़कर बताएं। हालांकि, बाद में योगी ने सदन में इस चौपाई की अपनी व्याख्या सुनाई।
अब सरकार अपने खर्चे पर करवा रही है रामचरितमानस पाठ: स्वामी प्रसाद
सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस पर दिए गए बयान पर अभी भी कायम हैं। मंगवार को स्वामी प्रसाद मौर्य मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूरे देश में लोगों ने रामचरितमानस का पाठ कराना बंद कर दिया। इसलिए सरकार अपने खर्चे से पाठ कराने पर मजबूर हो रही है।
यूपी के 80 लोकसभा सीटों पर है बीजेपी की नजर
योगी के इस दांव पर माना जा रहा है कि बीजेपी आने वाले चुनाव में अपना पुराने मुद्दे राम पॉलिटिक्स को छोड़ेगी नहीं, बल्कि पुरजोर तरीके से उठाएगी। अगले साल की शुरुआत में अयोध्या में राम मंदिर भी बनकर तैयार हो जाएगा। ऐसे में यह ऐलान काफी अहम हो जाता है। अगले साल यानी 2024 में ही लोकसभा का चुनाव भी है और यूपी में 80 सीटें हैं। बीजेपी की नजर यूपी के सभी सीटों पर हैं।