परियोजना के शुरू होते ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों की मदद से नदियों को जोड़ने के पहले फेज का काम केन - बेतवा लिंक शुरू कर दिया है। इस परियोजना के पूरा होते ही देश की 30 नदियों को जोड़ने की योजना का शुभारंभ हो जाएगा। इन सबके बीच परियोजना के शुरू होते ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि बेतवा का बहाव नीचे की ओर है, जबकि केन ऊपर बहती है। ऐसे में दोनों नदियों को जोड़ना बेहद मुश्किल है। नदियों की स्वाभाविक गति को मोड़ने को किसी अनहोनी को दावत देने जैसी बात कही जा रही है। केन बेतवा परियोजना को लेकर शोध कर रहे एनएफआई के फेलो प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि अतीत से सबक, पानी को लेकर बंटवारे के मुकदमे और दूसरे देशों के अनुभवों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा। हालांकि सरकार इसकी सफलता को लेकर आश्वस्त हैं।
दस हज़ार करोड़ होगी लागत
केन नदी मध्य प्रदेश के जबलपुर के पास कैमूर की पहाड़ियों से निकलकर 427 किमी उत्तर की ओर बहने के बाद उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में यमुना नदी में जाकर गिरती है। बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलकर 576 किमी बहने के बाद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में यमुना नदी में मिलती है। लगभग 10 हजार करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले केन-बेतवा लिंक में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हिस्से शामिल हैं। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश से केन नदी के अतिरिक्त पानी को 231 किमी लंबी एक नहर के जरिये उत्तर प्रदेश में बेतवा नदी तक लाया जाएगा। केन और बेतवा नदियों को जोड़ने का काम मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें शुरू कर चुकी हैं। परियोजना को पूरा करने के लिए नहरों एवं बांधों के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू हो चुका है और डूब क्षेत्र भी तैयार हो रहा है।
सात हज़ार लोग होंगे प्रभावित
उत्तर प्रदेश को केन नदी का अतिरिक्त पानी देने के बाद मध्य प्रदेश करीब इतना ही पानी बेतवा की ऊपरी धारा से निकाल लेगा। परियोजना के दूसरे चरण में मध्य प्रदेश चार बांध बनाकर रायसेन और विदिशा जिलों में नहरें बिछाकर सिंचाई का इन्तजाम करेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो योजना की राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण (एनडब्ल्यूडीए) की रिपोर्ट के अनुसार डोढ़न गाँव के निकट 9000 हेक्टेयर क्षेत्र में एक बांध बनाया जाएगा। इसके डूब क्षेत्र में छतरपुर जिले के बारह गांव आएंगे। पांच गांव आंशिक व सात गांव पूर्ण रूप से डूब जाएंगे। इस क्षेत्र के 7000 लोग प्रभावित व विस्थापित हो जायेंगे। जानकार दावा करते हैं कि परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन प्राकृतिक है क्योंकि शताब्दियों पहले नदियों का एक स्वाभाविक ढाल बना, जिसे कृत्रिम तरीके से बदलना सम्भव नहीं है।
शुरुआती दौर से ही राज्यों में मतभेद
केन बेतवा नदी जोड़ परियोजना पर शोध कर रहे एनएफआई फेलो प्रदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि केन बेतवा के जुड़ने से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान पूरी तरह से तबाह हो जाएगा। यहां बाघों के प्रजनन, आहार एवं आवास व प्रवास को लेकर भी सरकार चुप्प है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच एक तरह के जल विवाद की भी संभावना हमेशा बनी रहेगी क्योंकि परियोजना के शुरू होने से पहले ही दोनों राज्यों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए थे और इन्हीं मतभेदों के कारण कई वर्ष तक परियोजना अधर में लटकी थी। विवादों और विरोधों के बीच शुरू हो रहे इस प्रोजेक्ट के बताये जा रहे लाभों को लेकर पर्यावरणविद सशंकित हैं।