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UPSSSC नियुक्ति कार्यक्रम में सीएम योगी का बड़ा दावा, 9 लाख नौकरियां और पारदर्शी भर्ती पर जोर

UPSSSC नियुक्ति-पत्र वितरण में सीएम योगी ने पारदर्शी भर्ती पर जोर दिया। भ्रष्टाचार पर सख्ती, 9 लाख नौकरियां देने का दावा, और अगले वर्ष डेढ़ लाख भर्तियों की तैयारी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

May 03, 2026

UPSSSC ने नव-नियुक्त कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) व दंत स्वास्थ्य वैज्ञानिकों को दिए नियुक्ति पत्र (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UPSSSC ने नव-नियुक्त कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) व दंत स्वास्थ्य वैज्ञानिकों को दिए नियुक्ति पत्र (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UPSSSC Government Jobs: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा नव-चयनित कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) तथा दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और पूर्व की व्यवस्थाओं पर विस्तार से बात की। इस अवसर पर उन्होंने न केवल वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया, बल्कि 2017 से पहले की चयन प्रक्रियाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, भेदभाव और अव्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी नौजवान के सपनों का टूटना केवल एक व्यक्ति का नुकसान नहीं होता, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ भी अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं होती, तो उसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ता है।

‘भ्रष्ट चयन प्रक्रिया ने यूपी को बीमारू बनाया’

सीएम योगी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश में चयन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार देखने को मिलता था। उन्होंने कहा कि अयोग्य लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया जाता था, यहां तक कि जिनकी अपनी डिग्रियां संदिग्ध थीं, वे चयन आयोगों के प्रमुख बनकर नियुक्तियां कर रहे थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पैसे के लेनदेन के बिना नौकरी मिलना लगभग असंभव था। इस व्यवस्था ने न केवल योग्य युवाओं का मनोबल तोड़ा, बल्कि पूरे राज्य को अराजकता और अव्यवस्था की ओर धकेल दिया। उन्होंने कहा कि यही कारण था कि उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ के रूप में देखा जाने लगा।

न्यायालय को करना पड़ता था हस्तक्षेप

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले की अधिकांश भर्ती प्रक्रियाओं में न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि कई मामलों में अदालतों ने चयन प्रक्रियाओं पर रोक लगाई, क्योंकि उनमें पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव था।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय ऐसी स्थिति बन गई थी कि परीक्षा कोई और देता था और नियुक्ति पत्र किसी और को मिल जाता था। इस तरह की घटनाएं न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े करती थीं, बल्कि युवाओं के विश्वास को भी तोड़ती थीं।

एक दर्दनाक घटना का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक भावुक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे गोरखपुर से सांसद थे, तब एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। कारण था कि उसका नाम मेरिट सूची में आने के बावजूद उसे नियुक्ति पत्र नहीं मिला।

उन्होंने बताया कि जब वे उस युवक के परिवार से मिलने पहुंचे, तो परिवार के दर्द ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। यह घटना उनके लिए एक बड़ा सबक बनी और उन्होंने संकल्प लिया कि अगर उन्हें अवसर मिला तो वे भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाएंगे।

2017 के बाद बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में सत्ता संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले यह जानने की कोशिश की कि भर्तियां क्यों नहीं हो रही हैं। उन्हें पता चला कि लगभग हर भर्ती प्रक्रिया न्यायालय में लंबित थी।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और न्यायालय की अपेक्षाओं के अनुरूप नियमावली तैयार की जाए। इसके बाद सरकार ने तेजी से कदम उठाए और तीन महीने के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर न्यायालय से अनुमति प्राप्त की।

रिकॉर्ड भर्ती: 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी

सीएम योगी ने गर्व के साथ बताया कि उनकी सरकार ने अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। उन्होंने कहा कि यह देश के किसी भी राज्य में सबसे अधिक और पारदर्शी तरीके से की गई भर्ती का रिकॉर्ड है। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस भर्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि अब तक 2 लाख 20 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है, जो राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक साबित हुई है।

आने वाले समय में बड़े स्तर पर भर्तियां

मुख्यमंत्री ने भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर भर्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि केवल इस वर्ष अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लगभग 32 हजार नियुक्तियां करेगा।

इसके अलावा, शिक्षा चयन आयोग द्वारा हजारों शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जबकि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) लगभग 15 हजार पदों पर भर्ती करेगा। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड भी बड़ी संख्या में भर्तियां कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सब-इंस्पेक्टर और होमगार्ड भर्ती परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं और इन दोनों को मिलाकर लगभग 45 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

अगले एक वर्ष में डेढ़ लाख नौकरियों का लक्ष्य

सीएम योगी ने कहा कि यदि सभी आयोगों और बोर्डों की चल रही और प्रस्तावित भर्तियों को जोड़ दिया जाए, तो अगले एक वर्ष के भीतर प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख नौकरियों का सृजन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत इच्छाशक्ति के चलते यह संभव हो पाया है। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि भविष्य में भी भर्ती प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जारी रहेंगी।

युवाओं में बढ़ा विश्वास

मुख्यमंत्री के इस संबोधन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं में उत्साह और विश्वास देखने को मिला। नियुक्ति-पत्र प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों ने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण क्षण बताया और सरकार की पारदर्शी नीति की सराहना की।