
Saharanpur Mosque Controversy: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित 70 साल पुरानी मस्जिद को ढहाने की कार्रवाई शनिवार तड़के 4 बजे से जारी है। वहीं, अब इस पूरी कार्रवाई पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार के इस अभियान को गलत ठहराते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की है।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए लिखा कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले सहित पूरे राज्य में जो सरकारी अभियान चल रहा है जिसमें मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ढहाया जा रहा है वह बिल्कुल सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे नकारात्मक हालात से बचने के लिए इसे तुरंत रोकना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए अन्य उपायों को अपनाना चाहिए।
मायावती ने आगे लिखा कि एक संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के मानने वालों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान करे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में मस्जिदें दैनिक इबादत का मुख्य और अभिन्न हिस्सा हैं जहां दिन में कई बार सामूहिक रूप से नमाज पढ़ी जाती है। भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखते हुए देश और व्यापक जनहित में इन्हें सम्मान देना बहुत जरूरी है।
बिना उचित नियमों के घर तोड़ने की कार्रवाई पर भी मायावती ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी का घर नियमों और कानूनों का पालन किए बिना तोड़ देना जिससे उनके पूरे परिवार को सामूहिक रूप से सजा मिले और वे बेघर हो जाएं, इससे लोग बहुत परेशान हैं। ऐसी स्थिति में बसपा सरकार के शासनकाल की तरह कानून के द्वारा कानून का राज स्थापित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार के साथ साथ न्यायपालिका से भी इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है। साथ ही लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में 3000 स्क्वायर फीट में बनी यह मस्जिद करीब 70 साल पुरानी बताई जाती है। 10 फरवरी, 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने इसे अवैध बताते हुए DM से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से अवैध किराया वसूला जा रहा है।
डीएम के आदेश पर हुई जांच में मस्जिद अवैध पाई गई। 16 जुलाई, 2026 को नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इसे अवैध मानते हुए हटाने और 6.41 करोड़ रुपये का हर्जाना वसूलने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को जिला कोर्ट में याचिका दायर की लेकिन 2 सितंबर को जिला जज ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी। इसी के बाद शनिवार सुबह 4 बजे से 6 बुलडोजरों की मदद से मस्जिद ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई। सुरक्षा के मद्देनजर 5 कंपनी PAC, RAF और पुलिस के 200 जवान तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार पैदल गश्त और फ्लैग मार्च किया जा रहा है।