
लखनऊ. आगामी चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी जी तोड़ मेहनत कर रही है। विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए सबसे पहले अपने परिवार की नीतियों को मजबूत करने में जुटी है सपा। शिवपाल सिंह यादव से मतभेद खत्म कर सपा ने ये संकेत दिया कि अब वे एकजुट होकर काम करेंगे। इसी के साथ सपा ने बसपा के साथ गठबंधन कर मोदी लहर को रोकने के लिए कमर कस ली है। इसलिए परिवारवाद के साथ-साथ गुटबाजी भी खत्म करने के पूरे मूड में है समाजवादी। इसके लिए फर्रुखाबाद जिले से पिछड़ी जाती के ही किसी गैर यादव प्रत्याशी को चुनाव में उतारा जा सकता है। इनमें कई बड़े नेताओं के नाम चल रहे हैं।
सपा की नयी रणनीति
फर्रुखाबाद से कैबिनेट मंत्री के रिश्तेदार को समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनाकर स्थानीय नेताओं से नाराजगी को कम करने की कोशिश की जा रही है। इसी के साथ इनके साथ पार्टी की नांव को भी मजबूत किया जाने का प्रयास है। फर्रुखाबाद में पूर्व यूपी के मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के बेचे सचिन यादव और अलीगंज के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव के बेटे सुबोध यादव के बीच लंबे समय से गुटबाजी चल रही है।
गुटबाजी खत्म करने के मूड में सपा
2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा टिकट से चुनाव लड़े मुकेश राजपूत ने 4 लाख मतों से जीत हासिल कर सपा के रामेश्वर सिंह यादव को हराया था। वहीं टिकट कटने से नाराज सपा के बागी पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह यादव के बेटे सचिन यादव ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 58 हजार मत हासिल किए थे। यहां पर अच्छी संख्या में पिछड़ी जाती के मतदाताओं के चलते सपा यादव प्रत्याशी उतारती रही है। लेकिन अब वे इस गुटबाजी को खत्म करना चाहती है। इसी के साथ पार्टी प्रक्रिया में नए रणनीति बनाए जाने के साथ भाजपा को करारी हार देने की तैयारी में है सपा।