लखनऊ

संजय सिंह का बड़ा सवाल- जब दो लोग सीढ़ियों से नहीं उतर सकते, तो मिली कैसे NOC

Sanjay Singh Demands Probe into NOC: लखनऊ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे आप सांसद संजय सिंह ने अलीगंज अग्निकांड की निष्पक्ष जांच, एनओसी देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

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Jun 23, 2026
लखनऊ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे सांसद संजय सिंह, बोले- गुनहगारों को सख्त सजा मिले, एनओसी देने वालों की भी हो जांच (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
लखनऊ ट्रॉमा सेंटर पहुंचे सांसद संजय सिंह, बोले- गुनहगारों को सख्त सजा मिले, एनओसी देने वालों की भी हो जांच (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Sanjay Singh Demands Probe into NOCs, Strict Action in Lucknow Fire Tragedy: अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह मंगलवार को लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, जहां उन्होंने हादसे में घायल लोगों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने इस भीषण त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि घटना की हर पहलू से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए।

संजय सिंह ने कहा कि इस हादसे को केवल एक दुर्घटना मानकर भुलाया नहीं जा सकता। यह एक ऐसी त्रासदी है, जिसमें कई परिवारों ने अपने बच्चों और अपनों को खो दिया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले की गहन जांच कराई जाए और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाए।

एनओसी देने वाले अधिकारियों की भी हो जांच

ट्रॉमा सेंटर में मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद संजय सिंह ने कहा कि केवल भवन मालिक या संचालकों की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए, जिन्होंने इस इमारत को संचालन की अनुमति दी या एनओसी प्रदान की।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया और फिर भी उसे संचालित होने की अनुमति मिली, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है। ऐसे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। संजय सिंह ने कहा, "जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। यह पता लगना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में यह भवन संचालित हो रहा था और किन लोगों ने इसे अनुमति दी थी।"

सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के सांसद ने भवन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भवन में निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और जिस सीढ़ी का उपयोग किया जा रहा था, वह इतनी संकरी थी कि आपात स्थिति में लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना लगभग असंभव था।

उन्होंने कहा, "अगर किसी इमारत की सीढ़ियों से एक साथ दो लोग भी सुरक्षित नहीं उतर सकते, तो ऐसी इमारत में बड़ी संख्या में लोगों को कैसे रखा गया? यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला है।"

संजय सिंह ने कहा कि किसी भी बहुमंजिला भवन में पर्याप्त निकास मार्ग, फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। यदि यह सब नहीं था, तो यह बहुत बड़ी लापरवाही है।

दोषियों को मिले कड़ी सजा

सांसद संजय सिंह ने कहा कि इस दर्दनाक हादसे के लिए जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने की हिम्मत न कर सके।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में अधिकारियों, भवन मालिकों या अन्य जिम्मेदार लोगों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह केवल 15 परिवारों को न्याय दिलाने का मामला नहीं, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश देने का समय है कि लापरवाही की कीमत लोगों की जान से नहीं चुकाई जा सकती।

पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के बाद संजय सिंह ने घायल लोगों का हालचाल जाना और मृतकों के परिजनों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाया और कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

परिजनों से बातचीत के दौरान कई लोगों ने हादसे की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कुछ परिवारों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि भवन में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो शायद उनके बच्चे आज जीवित होते।

राजनीति से ऊपर उठकर न्याय की जरूरत

संजय सिंह ने कहा कि यह समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का है। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार का संदेह न रहे।

उन्होंने कहा कि इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शहरों में चल रहे कई संस्थानों और इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा करने की आवश्यकता है। यदि समय रहते ऐसे भवनों की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।