लखनऊ

Sarathi Didi : अब अकेली नहीं सफर करेंगी बेटियां, ‘सारथी दीदी’ के साथ महिला ड्राइवर और SOS का सहारा

Sarathi Didi 24x7 Monitoring: उत्तर प्रदेश में महिलाओं की यात्रा सुरक्षित बनाने के लिए ‘सारथी दीदी’ सेवा का विस्तार होगा। महिला चालक, एसओएस, लाइव लोकेशन और 24x7 निगरानी जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
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Sep 18, 2026
शहर से गांव तक मिलेगी बाइक, ऑटो और कैब की सुविधा, महिला यात्रियों को महिला चालक चुनने का विकल्प (फोटो सोर्स : Ritesh Singh
शहर से गांव तक मिलेगी बाइक, ऑटो और कैब की सुविधा, महिला यात्रियों को महिला चालक चुनने का विकल्प (फोटो सोर्स : Ritesh Singh)

Sarathi Didi Rural Transportउत्तर प्रदेश में महिलाओं की यात्रा को सुरक्षित, सुविधाजनक और अधिक सुलभ बनाने के साथ परिवहन के नए विकल्पों का दायरा गांवों तक बढ़ाने की तैयारी है। लखनऊ और कानपुर में सक्रिय ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तार देने की योजना सामने आई है। इसके तहत शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ने और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारी है।

 प्रस्तावित व्यवस्था में बाइक, ऑटो और कैब जैसी सेवाओं को शामिल किया जाएगा। वहीं महिला यात्रियों के लिए ‘सारथी दीदी’ सुविधा के जरिए महिला चालक से यात्रा चुनने का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। भारत टैक्सी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ‘सारथी दीदी’ में महिला यात्रियों के लिए महिला चालक द्वारा संचालित सवारी चुनने की सुविधा के साथ एसओएस, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग और 24x7 ग्राहक सहायता जैसी सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं।

महिला यात्रियों के लिए अलग विकल्प

‘सारथी दीदी’ पहल का मुख्य उद्देश्य महिला यात्रियों को महिला चालक के साथ यात्रा का विकल्प उपलब्ध कराना है। खासतौर पर उन महिलाओं और युवतियों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है, जिन्हें पढ़ाई, नौकरी, कारोबार या अन्य जरूरी कामों के लिए नियमित रूप से अकेले सफर करना पड़ता है। ऐप आधारित व्यवस्था के जरिए महिला यात्री महिला चालक द्वारा संचालित सवारी का चयन कर सकेंगी। भारत टैक्सी ने महिला यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस फीचर को अपनी सेवा में शामिल किया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार महिला यात्रियों को महिला चालक से संचालित राइड चुनने का विकल्प दिया गया है। इससे परिवहन सेवा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और महिला यात्रियों के लिए एक अलग विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सफर के दौरान सुरक्षा पर भी नजर

महिला सुरक्षा को केवल महिला चालक उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखा गया है। भारत टैक्सी की महिला-केंद्रित सुविधा में एसओएस, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग और 24x7 ग्राहक सहायता जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। आपात स्थिति में यात्री सहायता मांग सकें, इसके लिए डिजिटल सुरक्षा तंत्र को सेवा का हिस्सा बनाया गया है। ऐसे में यात्रा के दौरान किसी परेशानी की स्थिति में महिला यात्री के पास सहायता लेने का अतिरिक्त माध्यम रहेगा। लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सुविधा यात्रा की निगरानी और आपातकालीन सहायता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि स्थानीय स्तर पर पुलिस समन्वय और कंट्रोल रूम की व्यवस्था किस तरह लागू होगी, इसका विस्तृत संचालन ढांचा प्रदेश में विस्तार के दौरान स्पष्ट किया जाना बाकी रहेगा।

महिला चालक को प्रशिक्षण देते हुए प्रशिक्षक, परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

महिला ड्राइवरों के लिए रोजगार का अवसर

‘सारथी दीदी’ का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष महिलाओं को चालक के रूप में परिवहन क्षेत्र से जोड़ना है। भारत टैक्सी ने महिला सारथियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला-केंद्रित पहल शुरू की हैं। इसके तहत प्रशिक्षण, कौशल विकास और ऑनबोर्डिंग के जरिए महिलाओं को परिवहन सेवा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। महिलाओं को ई-रिक्शा, दोपहिया और कैब जैसे वाहनों के संचालन के लिए प्रशिक्षण देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे महिला यात्री को महिला चालक का विकल्प मिलने के साथ ही दूसरी ओर महिलाओं के लिए ड्राइविंग और मोबिलिटी सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यानी पहल का फोकस सिर्फ यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी है।

लखनऊ-कानपुर से 75 जिलों तक विस्तार की तैयारी

प्रदेश में ‘भारत टैक्सी’ मॉडल का विस्तार लखनऊ और कानपुर से आगे ले जाने की तैयारी है। 16-17 सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार इसे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है। इसमें जिला मुख्यालयों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ने पर जोर है। प्रस्तावित मॉडल में बाइक, ऑटो और कैब तीनों तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य सिर्फ बड़े शहरों में ऐप आधारित परिवहन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन इलाकों तक भी सेवा पहुंचाना है जहां संगठित कैब सेवाओं के विकल्प सीमित हैं।

गांवों तक पहुंचेगी ‘अपनी टैक्सी’

ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा पहुंचाने के लिए PACS के नेटवर्क को माध्यम बनाने की योजना है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियां गांवों में पहले से मौजूद सहकारी ढांचे का हिस्सा हैं। इनके नेटवर्क का इस्तेमाल परिवहन सेवा के विस्तार के लिए किए जाने से स्थानीय स्तर पर मोबिलिटी का दायरा बढ़ाने की कोशिश होगी। ग्रामीण इलाकों में अस्पताल, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लोगों को अक्सर निजी वाहन या स्थानीय साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यदि ऐप आधारित या स्थानीय स्तर पर संचालित बाइक, ऑटो और कैब सेवाएं उपलब्ध होती हैं तो रोजमर्रा की आवाजाही के लिए एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है।

PACS से परिवहन तक बढ़ेगा सहकारी नेटवर्क

PACS का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से ग्रामीण ऋण और कृषि संबंधी गतिविधियों के लिए होता रहा है। हालांकि सहकारी ढांचे के विस्तार के साथ PACS को कई अन्य गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। केंद्र की आधिकारिक जानकारी के अनुसार PACS को कृषि ऋण से आगे कई व्यावसायिक गतिविधियों में काम करने में सक्षम बनाने के लिए मॉडल उपनियमों का विस्तार किया गया है।

भारत टैक्सी मॉडल को PACS के माध्यम से गांवों तक ले जाने की योजना इसी व्यापक सहकारी नेटवर्क के इस्तेमाल से जुड़ी हुई है। इससे ग्रामीण परिवहन के लिए स्थानीय संस्थागत नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा सकेगा और सेवा को केवल शहरों तक सीमित रखने के बजाय छोटे कस्बों तथा गांवों तक विस्तार देने का रास्ता बन सकता है।

चालक सिर्फ ड्राइवर नहीं, हिस्सेदार भी

भारत टैक्सी की खासियत इसका सहकारी मॉडल भी है। केंद्र सरकार के अनुसार यह भारत का पहला सहकारी नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसमें ‘सारथी’ यानी चालक को स्वामित्व, प्रबंधन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखने की अवधारणा है। प्लेटफॉर्म शून्य-कमीशन मॉडल पर काम करने की बात करता है और सारथियों की सहकारी भागीदारी पर जोर देता है। इस मॉडल का उद्देश्य चालक को केवल सेवा देने वाले व्यक्ति के बजाय सहकारी व्यवस्था में भागीदार बनाना है। उत्तर प्रदेश में इसके विस्तार के साथ यह व्यवस्था स्थानीय ड्राइवरों को परिवहन सेवा से जोड़ने और यात्रियों को स्थानीय स्तर पर वाहन उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

किराये और सेवा की उपलब्धता पर भी जोर

भारत टैक्सी के आधिकारिक मॉडल में पारदर्शी किराया व्यवस्था और रियल टाइम वाहन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को राइड बुकिंग के लिए डिजिटल इंटरफेस उपलब्ध कराया गया है और 24x7 ग्राहक सहायता भी इसका हिस्सा है। यूपी में विस्तार के दौरान इन सुविधाओं का स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में डिजिटल बुकिंग, वाहन की उपलब्धता, ड्राइवर ऑनबोर्डिंग और आपात सहायता को प्रभावी ढंग से लागू करना इस मॉडल की पहुंच तय करेगा।

महिलाओं के लिए सुरक्षा पर फोकस

‘सारथी दीदी’ मॉडल में महिला यात्री और महिला चालक दोनों को केंद्र में रखा गया है। महिला यात्री को महिला चालक चुनने का विकल्प मिलता है, जबकि महिला चालक के लिए परिवहन क्षेत्र में काम करने का अवसर तैयार होता है। इसके साथ सुरक्षा के लिए एसओएस, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग और 24x7 सहायता जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इससे पहल का दायरा केवल कैब सेवा तक सीमित नहीं रहता। महिला सुरक्षा, रोजगार, डिजिटल मोबिलिटी और ग्रामीण कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में इसका विस्तार किया जा रहा है।

शहर से गांव तक बदल सकता है सफर का तरीका

यदि प्रदेश के सभी 75 जिलों में भारत टैक्सी मॉडल का विस्तार योजना के अनुरूप होता है तो परिवहन सेवा का दायरा जिला मुख्यालयों से आगे ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ सकता है। पीएसीएस के नेटवर्क के जरिए गांवों को जोड़ने की योजना से स्थानीय परिवहन की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास होगा। वहीं ‘सारथी दीदी’ के जरिए महिला यात्रियों को महिला चालक का विकल्प और सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

फिलहाल इस विस्तार की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की तैयारी में है। प्रदेश में मॉडल के व्यापक विस्तार के साथ इसकी वास्तविक उपलब्धता, स्थानीय संचालन व्यवस्था और सुरक्षा समन्वय की तस्वीर आगे और स्पष्ट होगी। इतना तय है कि प्रस्तावित मॉडल में महिला सुरक्षा और ग्रामीण परिवहन को एक ही व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसमें यात्रा सुविधा के साथ महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी शामिल हैं।