बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती के शासनकाल में बनाई गईं मूर्तियों मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती के शासनकाल में बनाई गईं मूर्तियों मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। चुनाव से पहले एक-एक कर विपक्षी दलों को घोटाले मामले में उलझाए जाने का सिलसिला जारी है। और अब मायावती भी इसमें फंसती दिख रही हैं। शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि प्रथम दृष्टया तो लगता है बीएसपी सु्प्रीमो को मूर्तियों पर खर्च किया गया जनता का पैसा लौटाना चाहिए।
सतीश चंद्र मिश्र ने दिया बयान-
इस पर मायावती की ओर से बसपा के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है, साथ ही कई बातें साफ भी की है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुनवाई के दौरान सिर्फ टिप्पणी की है, ना कि कोई आदेश दिया है जैसा कि मीडिया में कहा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस सुनवाई पर कोई आदेश नहीं दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी और उसी सुनवाई के दौरान अदालत इस पर फैसला करेगी।
इतने करोड़ रुपए हुए थे खर्च-
आपका बता दें कि यूपी के लखनऊ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बनाए गए पार्कों पर कुल 5,919 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। वहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन पार्क और मूर्तियों के रखरखाव के लिए 5,634 कर्मचारी बहाल किए गए थे। इसमें हाथी की मूर्तियों में सबसे बड़ी धनराशि खर्च करने का आरोप लगाया गया है। इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 2009 में याचिका याचिका दायर की थी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि नेताओं को अपनी और पार्टी के चिह्न की प्रतिमाएं बनाने पर जनता का पैसा खर्च न करने के निर्देश दिए जाएं।