
लखनऊ. आज सावन का पहला सोमवार है। आज के दिन महिलाएं चाहे वो सुहागन हों चाहे लड़कियां सभी व्रत रखती हैं। सुहागन अपनी पति की लम्बी आयु के लिए तो नवयुवतियां इसलिए रखती हैं की उनको अच्छा पति मिले। आज सुबह से ही भगवान शिव के भक्त प्रभु के आराधना करने के लिए मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए लाईन लगा कर अपनी बारी को इंतज़ार कर रहे हैं। मान्यता यह है कि सावन के सोमवार को विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आज आपको लखनऊ के इंदिरा नगर के रहने वाले आचार्य़ अशोक त्रिपाठी बताएंगे कि सावन में कैसे युवतियों के पूजा करनी चाहिये कि शिव जी प्रसन्न हो जाएं-
सावन के सोमवार की पूजा विधि
1- सुबह जल्दी उठकर में स्नान कर ले।
2- पांच या सात साबुत बेल के पत्ते साफ पानी से धोएं और फिर उनमें चंदन छिड़क दें।
3- फिर एक तांबे के लोटे में पानी या गंगाजल भरें और उसमें कुछ साबुत और साफ चावल के दानें डाल दें। इसके बाद लोटे के ऊपर बेल के पत्ते और फूल रख दें।
4- लोटे में जल लेकर शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें। रुद्राभिषेक करते हुए ऊं नम: शिवाय या भगवान शिव के किसी अन्य मंत्र का जप करें।
5- इसके बाद शिवचालीसा, रुद्राष्टक और तांडव स्त्रोत का पाठ भी किया जा सकता है।
6- इसके बाद व्रत या बिना व्रत वाला प्रसाद ग्रहण करें।
सावन के सोमवार के व्रत की कथा
एक कथा के अनुसार जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने सावन के महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया। यही कारण है कि सावन के महीने में सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कुंवारी लड़कियों व्रत रखती हैं। सोमवार व्रत में भगवान भगवान शंकर के साथ माता पार्वती और श्री गणेश की भी पूजा की जाती है। व्रती यथाशक्ति पंचोपचार या षोडशोपचार विधि-विधान और पूजन सामग्री से पूजा कर सकता है। व्रत स्त्री-पुरुष दोनों कर सकते हैं। शास्त्रों के मुताबिक सोमवार व्रत की अवधि सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक है। सोमवार व्रत में उपवास रखना श्रेष्ठ माना जाता है, किंतु उपवास न करने की स्थिति में व्रती के लिए सूर्यास्त के बाद शिव पूजा के बाद एक बार भोजन करने का विधान है। सोमवार व्रत एक भुक्त और रात्रि भोजन के कारण नक्तव्रत भी कहलाता है।