Indian woman on Mount Chaoyu:पर्वतारोही शीतल ने चीन के माउंट चोआयू पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है। उसके इस जज्बे को आज पूरा देश सलाम कर रहा है। नन्ही सी उम्र में शीतल माउंट एवरेस्ट पर भी तिरंगा फहरा चुकी हैं।
Indian woman on Mount Chaoyu:पर्वतारोही शीतल ने अपने साहस और जज्बे से पूरी दुनियां को कायल कर दिया है। उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ निवासी शीतल में बचपन से ही पर्वतारोहण के प्रति जज्बा रहा है। चीन की चोटी माउंट चोआयू पर तिरंगा फहराने वाली शीतल कई चोटियों को फतह कर सीमांत पिथौरागढ़ का नाम देश-दुनिया में रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने अब तक माउंट कंचनजंगा, एवरेस्ट, अन्नपूर्णा आदि पर्वतों का आरोहण किया। उसके बाद नेपाल के काठमांडू पहुंचने के बाद उन्होंने चाइना वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन वीजा मिलने में देरी के कारण उन्हें अपनी यात्रा के लिए इंतजार करना पड़ा। आखिरकार शीतल ने चीन के माउंट चोआयू पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन कर दिया। उनकी इस उपलब्धि पर आज पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है।
सीमांत की शीतल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और उपलब्धि अपने नाम की है। उन्होंने समुद्रतल से 26,684 फीट ऊंचाई पर स्थित चीन की चोटी माउंट चोआयू पर तिरंगा फहराया। 21 सितंबर को वह सड़क मार्ग से चाइना के किरोंग और फिर थिंगरी होते हुए 24 सितंबर को एडवांस बैस कैंप पहुंचीं। और वहां से माउंट चोआयू पर फतह करना शुरू किया। छह अक्तूबर को उन्होंने माउंट चोआयु का आरोहण शुरू किया। आठ अक्तूबर की सुबह करीब 8 बजे के आसपास शीतल ने माउंट चोआयु की चोटी पर पहुंचकर तिरंगा फहराया। शीतल का दावा है कि वह इस पर्वत पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला हैं।
पर्वतारोही शीतल के नाम उत्तराखंड से सबसे कम उम्र में एवरेस्ट आरोहण करने वाली महिला का रिकॉर्ड है। शीतल ने महज 14 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था। इसके अलावा आदि कैलास रेंज में माउंट चीपीदंग को लीड करने वाली शीतल ने खेलो इंडिया नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता। उनकी इन उपलब्धियों को देखते हुए तीलू रौतेली, कुमाऊं आईकॉन, तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।