- Social Anxiety Disorder भारत की दूसरी सबसे आम समस्या है- अनजाने डर की गिरफ्त में आ रहे 15-25 साल के युवा- Social Phobia दूसरे की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का डर है- जानें- Social Phobia लक्षण और उपचार
लखनऊ. सावधान! कहीं आपको या फिर आपके किसी करीबी को सोशल फोबिया तो नहीं हैं। सामाजिक डर को ही सोशल फोबिया (Social Anxiety Disorder) कहा जाता है। सोशल फोबिया दूसरे की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का डर है। यह भारत में दूसरी सबसे आम समस्या है। किंज जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के मनोचिकित्सकों के अनुसार, सोशल फोबिया की चपेट में किशोर व युवा आ रहे हैं। उनके पास जो मामले पहुंच रहे हैं, उनमें से ज्यादातर की उम्र 15 से 25 साल की होती है। मनोचिकित्सक डॉ. नेहा आनंद बताती हैं कि वह हफ्ते में चार से पांच ऐसे मरीज देखती हैं, जिन्हें सोशल फोबिया होता है। उन्होंने बताया कि अगर समय पर इसका ट्रीटमेंट न हुआ तो बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या और बढ़ने लगती है, जो अपने साथ कई शारीरिक व मानसिक बीमारियां लेकर आती है।
मनोचिकित्सकों के मुताबिक, इस फोबिया (Social Phobia) के शिकार लोग सा इमेजिन करके भी डरते हैं। वह किसी भी काम को करने से इसलिए कतराते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि लोग उन पर हसेंगे। इसीलिए वह जी चुराते हैं। नतीजन गुमसुम रहने लगते हैं और किसी से भी अपनी फीलिंग शेयर नहीं करते। केजीएमयू के मनोचिकित्सक डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि बहुत सारे दोस्तों के बीच जब बातचीत करने में हिचकिचाहट हो, अकेले बाहर जाने से कतराते लगें, किसी के पास में खड़े होने या बैठ जाने से लिखना और फोन पर बात करने में परेशानी महसूस होने लगे तो आपको सोशल फोबिया की समस्या हो सकती है।
यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
सोशल फोबिया (Social Anxiety) के शिकार आम लोगों जैसे ही होते हैं, बस खास सिचुएशन में इन्हें पहचाना जा सकता है। डर लगने पर घबराहट होना इस बीमारी का पहला लक्षण (Social Phobia Symptoms) है। इसके अलावा किसी से भी आंख मिलाकर बात न करना, हमेशा यही लगे कि लोग मेरे बारे में बात कर रहे हैं, किसी काम को करने से पहले कहना कि लोग क्या कहेंगे, लोगों की उपस्थिति में घबराहट होना, लोगों के बीच जाने पर दिल की धड़कन बढ़ जाना, पसीने आना, जोर-जोर से पैर हिलाने लगना, चेहरा लाल हो जाना, उल्टी आना और कंपकंपी होना इस सोशल फोबिया के प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा सेल्स कॉन्फिडेंस न होने की वजह से भी यह सोशल फोबिया होता है।
सोशल फोबिया का इलाज जरूरी
सोशल फोबिया के शिकार लोगों के ट्रीटमेंट (Social Phobia Treatment) के लिए सबसे पहले किसी डॉक्टर की हेल्प लें। साइकोलॉजिस्ट की मदद और दवाओं के इस्तेमाल से इस बीमारी को दूर किया जा सकता है। योगा, मेडिटेशन भी इस बीमारी से राहत दिलाने में बहुत ही मददगार होता है। डॉ. आदर्श त्रिपाठी कहते हैं कि सोशल फोबिया के मरीजों को दवाई और साइकोलॉजिकल थेरेपी से ठीक करने की कोशिश की जाती है। पीड़ित की चिंता कम हो, इसके लिए एंटी एंग्जायटी दवाएं दी जाती हैं। रोगी को हालात का सामना करने के लिए तैयार किया जाता है। साथ ही उसे एक्सरसाइज व मेडिटेशन की सलाह दी जाती है। डॉ. नेहा आनंद की मानें तो ऐसे मामलों में चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही मरीज के अभिभावकों, दोस्तों और रिश्तेदारों की भी काउंसलिंग जरूरी है। उन्हें भी समझाया जाता है कि सोशल फोबिया का शिकार मरीज से संवाद बंद न करें।