लखनऊ

ओबीसी वोटबैंक साधने में जुटी सपा को लगा अपनों का झटका! राम आसरे कुशवाहा के आने और दिशांत त्यागी के जाने के सियासी मायने

Ramashray Kushwaha Joins Samajwadi Party: यूपी में 2027 चुनाव से पहले बड़ा सियासी फेरबदल हुआ है। 6 बार के मंत्री रहे बीजेपी नेता रामआश्रय कुशवाहा सपा में शामिल हो गए हैं, वहीं सपा नेता दिशान्त त्यागी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं।
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Sep 17, 2026
Akhilesh Yadav
अखिलेश यादव (photo- ians)

UP Politics Party Switching Before 2027 Elections:उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी की राजनीति में एक साथ दो बड़े घटनाक्रम देखने को मिले हैं। एक तरफ भाजपा के पूर्व छह बार के मंत्री प्रोफेसर राम आसरे कुशवाहा सपा में शामिल हो गए, तो दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली नेता दिशांत त्यागी सपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले हैं। ये दोनों घटनाएं सपा के ओबीसी समीकरणों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

राम आसरे कुशवाहा का सपा में आगमन

पूर्व मंत्री राम आसरे कुशवाहा बुधवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। वे पहले भी सपा में रह चुके हैं। सपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी ऐसा महसूस होता है जैसे नेताजी मुलायम सिंह यादव उनके बीच मौजूद हैं। कुशवाहा ने अखिलेश यादव को वही सम्मान और पदवी देने की बात कही। उन्होंने समर्थकों से शपथ लेने की अपील करते हुए कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे, तब तक घर नहीं बैठेंगे।
कुशवाहा के साथ रालोद, भाजपा, निषाद पार्टी, बसपा, लेखपाल संघ, अपना दल और एआईएमआईएम समेत कई संगठनों के लोग भी सपा में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने विश्वकर्मा जयंती के मौके पर कहा कि सपा सरकार बनने पर विश्वकर्मा जयंती पर छुट्टी कराई जाएगी और रिवर फ्रंट पर भव्य मंदिर भी बनवाया जाएगा।

दिशांत त्यागी का संभावित प्रस्थान

दूसरी ओर, सपा नेता दिशांत त्यागी पार्टी को बड़ा झटका देने वाले हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे 22 सितंबर को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होंगे। दिशांत त्यागी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े नेता हैं और विश्व त्यागी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उनके जाने से सपा को पश्चिमी यूपी में नुकसान हो सकता है, जहां पार्टी संगठन मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है।

सियासी मायने और ओबीसी समीकरण

राम आसरे कुशवाहा कुशवाहा समुदाय से आते हैं, जो ओबीसी वोटबैंक का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका सपा में आना पार्टी के लिए ओबीसी समीकरण मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। वहीं दिशांत त्यागी त्यागी समुदाय से जुड़े हैं, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखते हैं। उनके कांग्रेस जाने से सपा को अपनों का झटका लगने की आशंका है।

एक तरफ सपा ओबीसी वोटबैंक साधने में जुटी हुई है, तो दूसरी तरफ अपने ही नेताओं के दलबदल का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस का कुनबा भी बढ़ रहा है। हाल ही में एआईएमआईएम के नेता आसिम वकार भी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

2027 के चुनाव से पहले ये घटनाक्रम यूपी की राजनीति में नए समीकरण बनाने वाले साबित हो सकते हैं। सपा को कुशवाहा जैसे नेताओं के आने से फायदा तो हो सकता है, लेकिन दिशांत त्यागी जैसे प्रभावशाली नेता के जाने का असर पश्चिमी यूपी में साफ दिखेगा।

Updated on:
17 Sept 2026 09:16 pm
Published on:
17 Sept 2026 09:16 pm