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विवेक तिवारी हत्याकांड: प्रशांत चौधरी दोषी करार, संदीप सिंह बरी; 21 सितंबर को फैसला, जानिए क्या था 8 साल पुराना मामला

Vivek Tiwari Murder Case Court Verdict: बहुचर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में लखनऊ कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया गया है जबकि दूसरा आरोपी बरी हो गया है। जानिए क्या है विवेक तिवारी हत्याकांड मामला...
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लखनऊ

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Mohsina Bano

Sep 17, 2026

Vivek Tiwari Murder Case, Prashant Chaudhary, Lucknow Court Verdict, Apple Manager Killed, UP News, Lucknow Court

विवेक तिवारी हत्याकांड (PC: X/@ProfNoorul)

Vivek Tiwari Murder Case News: उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित 'विवेक तिवारी हत्याकांड' में अदालत ने आखिरकार 8 साल बाद अपना फैसला सुना दिया है। लखनऊ की जिला जज कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304(2) के तहत गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है। वहीं इस मामले में दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को कोर्ट ने आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत अब दोषी ठहराए गए प्रशांत चौधरी की सजा की अवधि को लेकर 21 सितंबर को सुनवाई करेगी और इसी दिन कोर्ट सजा का ऐलान भी कर सकती है।

प्रशांत चौधरी दोषी करार और संदीप बरी

विवेक तिवारी हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस के 2 सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार को आरोपी बनाया गया था। दोनों के खिलाफ लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी प्रशांत चौधरी को दोषी मान लिया है। वहीं दूसरे आरोपी संदीप कुमार को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। संदीप के बरी होने के बाद उनके खिलाफ चल रहा कानूनी मुकदमा समाप्त हो गया है। अब दोषी ठहराए गए प्रशांत चौधरी की सजा की अवधि को लेकर 21 सितंबर को सुनवाई होगी जिसके बाद अदालत सजा सुनाएगी।

ये है विवेक तिवारी हत्याकांड मामला

यह पूरा मामला 28 सितंबर, 2018 की रात का है। लखनऊ के गोमती नगर विस्तार इलाके में एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना के वक्त वह अपनी महिला सहकर्मी सना खान के साथ कार से वापस लौट रहे थे। प्राथमिकी के मुताबिक उस दौरान नाइट पेट्रोलिंग कर रहे गोमती नगर विस्तार थाने के इन पुलिसकर्मियों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया था और गोली मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। मामले के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में इस घटना को लेकर चर्चा हुई।

घटना के तुरंत बाद दोनों आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। दोनों सिपाहियों को पुलिस सेवा से भी बर्खास्त कर दिया गया था। करीब 8 साल तक चली लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद अब जाकर इस मामले में फैसला आया है।

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