
Dhirendra Shastri Lord Krishna Remark: बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित विवादित बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने उनके बयान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वाराणसी में वकीलों ने भी विरोध प्रदर्शन किया।
लखनऊ में समाजवादी पार्टी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण कन्हैया पाल ने कहा कि सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि भगवान श्री कृष्ण, जिन्हें हम सब योगिराज के रूप में जानते हैं और जिन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया, उन्होंने कहा था कि ‘कर्म ही पूजा है’। कर्तव्य सर्वोपरि है और कर्म ही पूजा है। हमें हैरानी है कि धीरेंद्र शास्त्री, जो दिन-रात सनातन का ढोल पीटते हैं और प्रचारक हैं, अचानक भगवान के खिलाफ और खासकर भगवान श्री कृष्ण के खिलाफ ऐसा विवादित बयान दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि उन्होंने तिरछे या टेढ़े तरीके से बात की, वे गलत हैं। कृष्ण कन्हैया पाल ने बताया कि उनका जन्म जन्माष्टमी की आधी रात को हुआ था, इसलिए माता-पिता ने उनका नाम कृष्ण कन्हैया रखा। वे लखनऊ हाईकोर्ट में वकालत करते हैं और भगवान कृष्ण पर किसी भी विवादित बयान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
आप नेता संजय सिंह ने धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक मूर्ख किस्म के व्यक्ति हैं। उन्होंने भगवान श्री राम का अपमान किया, फिर भगवान श्री कृष्ण का अपमान किया। उन्होंने वृंदावन का भी अपमान किया। महाकुंभ में भगदड़ में लोगों की मौत होने पर उन्होंने कहा कि उन्हें मुक्ति मिल गई। ऐसे असंवेदनशील और मूर्ख व्यक्ति को धार्मिक नेता कहना खुद हिंदू धर्म का अपमान है। उन्होंने सनातन धर्म, हिंदू धर्म, भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण का अपमान किया है, जिन्हें पूरी दुनिया में पूजा जाता है।
वाराणसी में वकीलों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथित विवादित बयान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। एक वकील ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ प्रदर्शन इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने भगवान श्री कृष्ण का अपमान किया, करोड़ों भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाई और सनातन धर्म का पालन करने वालों का अपमान किया। पवित्र धार्मिक मंच (व्यास पीठ) पर बैठकर भगवान श्री कृष्ण और भगवान श्री राम की तुलना इस तरह करना और बेतुकी भाषा का इस्तेमाल करना किसी संत का काम नहीं है। वे धोखेबाज हैं।