सुुप्रीम कोर्ट ने इस फैसला का ऐलान किया है कि अब सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है।
लखनऊ. सुुप्रीम कोर्ट ने इस फैसला का ऐलान किया है कि अब सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है। अपने ही आदेश को पलट कर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए सरकार के हलफनामे को स्वीकार कर लिया।
सिनेमाघरों के मालिक पर होगा निर्भर
इस फैसले के बाद फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाना या न बजाना सिनेमाघरों के मालिकों की मर्जी पर निर्भर होगा। कोर्ट ने कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने से दिव्यांगों को छूट मिलती रहेगी।
पहले लोगों ने जताई थी आपत्ति
जाहिर है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में फिल्मों से पहले राष्ट्रगान गाने का ऐलान किया था, तब लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि थिएटर में मनोरंजन के लिए फिल्म देखी जाती है, तो राष्ट्रगान का सवाल कहां से आ गया।
राष्ट्रगान नहीं गाने वाला राष्ट्र विरोधी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले साल 23 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान कहा था कि राष्ट्रगान नहीं गाने को राष्ट्र विरोधी नहीं कहा जा सकता है। देशभक्ति दिखाने के लिए राष्ट्रगान गाना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने संकेत दिया था कि वह 2016 में राष्ट्रगान मामले में दिए फैसले की समीक्षा कर सकता है।
फैसले का समर्थन केंद्र ने भी किया
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2016 में दिए अपने आदेश में कहा था कि सिनेमा हॉल में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा। इस फैसले का समर्थन केंद्र ने भी किया था।
तो इसलिए बदला अपना आदेश
अपने आदेश को बदलने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने इसलिए लिया क्योंकि कई बार ऐसे मामले सामने आते थे कि भीड़ में खड़ें न हो पाने के कारण मार पीट की बात हो गयी। कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति सिनेमा हॉल में खड़ा नहीं हो सकता। इन सब बातों को ध्यान मेें रखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान गाने को अनिवार्य करने का फैसला बदल दिया।