आज भी जिंदा हैं सूर्पणखा..
उप्र के सामाजिक परिवेश में सीता, राधा, रुक्मणी, द्रोपदी और अहिल्या रची-बसी हैं। यह घर-घर में पूज्य हैं। कोई त्याग, कोई ममता तो किसी को प्रेम की प्रतीक देवी माना जाता है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में इनकी अनेक पौराणिक गाथाएं हैं। लेकिन, इन देवियों केउलट कुछ ऐसे नाम भी हैं जिन्हें बुरा खिताब मिला हुआ है। कहीं-कहीं तो यह कुलटा के रूप में गाली की भी प्रतीक हैं। यह ऐतिहासिक पात्र हैं- सूर्पनखा, पूतना, होलिका और मंथरा। इनमें से किसी को उनकी दुष्टता, किसी को क्रूरता तो किसी को चालबाज के रूप में याद किया जाता है। इन्हें बुराई की प्रतीक आखिर क्यों माना जाता है। आइए जानते हैं इनके विषय में।
‘शूर्पणखा’ का अट्हास भयानक
हाल ही में राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेत्री रेणुका चौधरी की खिलखिलाहट पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ...रामायण सीरियल के बाद आज हमें ऐसी हंसी सुनने का मौका मिला है। पीएम मोदी का इशारा रामायण की प्रमुख महिला नेगेटिव किरदार शूर्पणखा की ओर था। इसके बाद राजनीति गर्म हो गयी। खूब हंगामा मचा। ...तो शूर्पणखा आखिर कौन थी। उसकी चर्चा रामायण काल से लेकर आज तक क्यों होती रहती है। शूर्पणखा रावण की बहन थी। वह कुरूप और मायावी राक्षसी थी। जरूरत पडऩे पर वह अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण कर लेती थी। उसके नाखून सूर्प जैसे बड़े और चौड़े थे। इसलिए उसे शूर्पनखा कहा गया। राम-रावण युद्ध की एक वजह इसे भी माना गया। कहा जाता है कि शूर्पणखा राम के पंचवटी प्रवास के दौरान उनके प्रेम की भूखी हो गयी। राम से शादी का प्रस्ताव रखा। लेकिन राम ने ठुकरा दिया। वह लक्ष्मण के पास गयी। लक्ष्मण ने दुत्कार दिया। इसके बाद विवाद हुआ। लक्ष्मण ने गुस्से में शूर्पणखा की नाक काट ली। इसके बाद प्रतिशोध में राम-रावण युद्ध हुआ। कहा जाता है कि उसका अट्टाहास महाभयानक, विलाप कंपा देने वाला होता था।
‘मंथरा’ की कुटिलता जगजाहिर
रामकथा की महत्वपूर्ण पात्र है मंथरा। यह दशरथ की सबसे प्रिय और सुंदर रानी कैकेयी की दासी थी। मंथरा ने ही कैकेयी को भडक़ाया, जिसके कारण कैकेयी ने राम के राज्याभिषेक में विघ्न डाला। कहते हैं कि मंथरा न होती तो राम को वनवास न होता। और रामायण न रची जाती। मंथरा दशरथ की पत्नी कैकयी की सेविका थी। इसने राम को वनवास और भरत को राजगद्दी के लिए भडक़ाया। एक ऐसी नौकरानी जो बात को इधर से उधर करती थी। घर में लड़ाई लगाती थी। इतिहास में इसके किरदार को एक कूबड़ी महिला के रूप में दिखाया गया है। जो न केवल बदसूरत थी बल्कि स्वार्थी, चालाक और हद दर्जे तक जाकर अपनी स्वार्थ को सिद्ध करती थी। मंथरा को मोही, लोभी बताया गया है। जो पल-पल पर कैकेयी को भडक़ाती है। हालांकि मंथरा का राम से बैर नहीं था, लेकिन वह अपनी एक गलती से हमेशा के लिए अपयश का पात्र बन गई।
ममत्व की दुश्मन पूतना
कृष्णकाव्य की महत्वपूर्ण पात्र है पूतना। यह आततायी राक्षस कंस के कहने पर नन्हें नटखट कान्हा को मारने आयी थी। इसके लिए वह खूबसूरत स्त्री का रूप धारण कर अपने स्तनों में जहर लगाकर कान्हा को मारना चाहती थी। लेकिन स्वयं काल कवलित हो गई। पूतना कोई साधारण स्त्री नहीं थी। पूर्वकाल में वह राजा बलि की बेटी थी, राजकन्या थी। लेकिन पूर्व जन्मों के कृत्यों के कारण राक्षती बनी और कंस के कहने पर श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मारना चाहती थी। जैसे ही पूतना ने बालक कृष्ण को स्तनपान कराया। उसी दौरान श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। पूतना तो तर गयी। लेकिन तब से लेकर आज तक वृंदावन सहित देश-विदेश में यह कथा हर साल दोहरायी जाती है। और पूतना ममत्व की दुश्मन के रूप में प्रचारित हो गयी।
होलिका, सगे भतीजे की जान लेने की कोशिश
हरदोई के अभिमानी राक्षस राजा हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भारतीय समाज में एक ऐसी महिला विलेन है जो खुद अपने सगे भतीजे की जान लेने की कोशिश करती है। यह हिरण्यकश्यप के कहने पर अपने भतीजे प्रहलाद को होलिका में जिंदा दहन करने की कोशिश की। होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि जला नहीं सकती। इसीलिए होलिका जब बालक प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि पर बैठी तो भगवान के अति प्रिय और भक्त प्रहलाद तो बच गए और होलिका आग में जल गयी। सदियां बीत गयीं। लेकिन आज तक होलिका दहन के दिन दुष्ट होलिका को लोग उसके कृत्य के लिए जरूर याद करते हैं। जब भी संगे संबंधियों को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है तो उसे होलिका के नाम से जलील किया जाता है।