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अब नहीं जमे रह पाएंगे अधिकारी, योगी सरकार की नई ट्रांसफर पॉलिसी से बढ़ेगी हलचल, 3 साल में होगा तबादला तय

योगी सरकार की नई ट्रांसफर नीति से प्रशासन में बड़ा बदलाव आएगा। लंबे समय से एक जगह तैनात कर्मचारियों को हटाया जाएगा।
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लखनऊ

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Anuj Singh

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Updated: 17 Apr 2026, 8:30 AM IST

up gps survey of sugarcane crops to be conducted preparations begin on cm yogi instructions

फोटो में सीएम योगी (सोर्स: ANI)

UP Government News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने साल 2026-27 के लिए नई ट्रांसफर नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को ज्यादा पारदर्शी, साफ और तेज बनाना है। लंबे समय से एक ही जगह पर जमे हुए अधिकारी और कर्मचारियों को नए स्थान पर भेजकर उनमें नई ऊर्जा भरना भी इसका बड़ा लक्ष्य है। इससे भ्रष्टाचार कम होगा और काम की रफ्तार बढ़ेगी। उच्च स्तरीय बैठक में इस मसौदे पर सहमति बन चुकी है। जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।

तबादले के नए नियम

नई नीति के अनुसार, किसी भी जिले में तीन साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य होगा। मंडल स्तर पर सात साल की सेवा के बाद भी कर्मचारी को जरूर बदला जाएगा। अगर कोई कर्मचारी लंबे समय से एक ही पद या एक ही जगह पर बैठा है, तो उसे दूसरे स्थान या दूसरे विभाग में भेज दिया जाएगा। समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। समूह 'ग' और 'घ' के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत रखी गई है। अगर जरूरत पड़े तो विभागीय मंत्री की विशेष अनुमति से इन सीमाओं को बढ़ाया भी जा सकता है। विभाग के प्रमुखों को तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय मिलेगा।

दिव्यांग कर्मचारियों को विशेष छूट

सरकार ने मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए दिव्यांग कर्मचारियों के लिए अच्छे प्रावधान किए हैं। जिन कर्मचारियों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा है, उन्हें सामान्य तबादलों से छूट मिलेगी। अगर कोई दिव्यांग कर्मचारी खुद तबादला चाहे तो उसे अपनी पसंद के जिले में प्राथमिकता दी जाएगी। जिन कर्मचारियों के परिवार में गंभीर दिव्यांग सदस्य हैं, खासकर मंदबुद्धि या पूरी तरह अक्षम बच्चा है, उन्हें भी उनकी इच्छा के अनुसार तैनाती दी जाएगी। इससे परिवार की मुश्किलें कम होंगी।

परिवार और अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

सरकारी सेवा में काम करने वाले पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या पड़ोस के जिलों में तैनात करने की कोशिश की जाएगी। इससे परिवार की जिम्मेदारियों को आसानी से निभाया जा सकेगा। समूह 'क' के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी। अगर पद मंडल स्तर का है, तो गृह मंडल में भी नहीं भेजा जाएगा। जिन कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा पर संदेह हो, उन्हें किसी भी संवेदनशील पद पर नहीं लगाया जाएगा। आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में खाली पदों को पहले भरा जाएगा ताकि विकास के काम प्रभावित न हों।

नीति के फायदे

यह नई ट्रांसफर नीति प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को प्रभावित करेगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था ज्यादा कुशल बनेगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और कर्मचारियों के बीच उचित घुमाव सुनिश्चित होगा। लंबे समय तक एक जगह बैठने से जो सुस्ती आ जाती है, उसे भी दूर किया जाएगा।