सपा और बसपा के गठबंधन से बढऩे लगी हैं दूरियां।
लखनऊ. राजा भैया और अखिलेश यादव में लगता है सब कुछ सही नहीं चल रहा है। समाजवादी पार्टी कुंडा के इस निर्दलीय विधायक को हमेशा सपोर्ट करती रही है। अक्सर यह कहा जाता है कि या लोगों द्वारा चर्चा आमतौर पर सुनी जाती रही है कि अगर सपा की सरकार आई तो राजा भैया का मंत्री बनना तय है और होता भी यही रहा है। जब बसपा की सरकार में मायावती ने राजा भैया पर शिकंजा कसा था तो सपा उनके साथ खड़ी थी, लेकिन आज वही सपा है और वही राजा भैया हैं लेकिन दोनों के बीच अब वे नजदीकियां नहीं देखने को मिल रही हैं जैसी पहले थीं। राजा भैया ने अपने ट्वीट में जिस तरह से अखिलेश यादव पर निशाना साधा है उससे तो यही लगाता है कि अब राजा और अखिलेश के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे।
साफ कर दिया था इंकार
पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव के दौरान से ही राजा भैया और सपा के बीच दुरियां बढऩी शुरू हुई थीं। राज्यसभा चुनाव में सपा ने बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर का समर्थन करने का एलान किया था। वहीं राजा भैया ने अपने कट्टर दुश्मन मायावती के उम्मीदवार को वोट देने से साफ इंकार कर दिया था। वहीं अब जैसे-जैसे सपा और बसपा में गठबंध की बातें आगे बढ़ रही हैं वैसे-वैसे लगता है राजा भैया की सपा से दुरियां बढ़ती जा रही हैं।
महाराणा प्रताप जयंती को लेकर राजा भैया ने ट्वीट कर अखिलेश यादव पर इशारों में निशाना साधा है। ट्वीट में राजा भैया ने कहा है कि महाराणा प्रताप को केवल क्षत्रियों का नेता मानना उनका अपमान है, वे विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध लड़े और भारत मां के सच्चे सपूत थे। उन्होंने नाम लिए बगैर ट्वीट किया है कि महाराणा प्रताप को क्षत्रियों का नेता मानाना उनका अपमान है। बतादें कि सपा ने बुधवार को महाराणा प्रताप की जयंती पर विशेष आयोजन किया था। इस दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष्ज्ञ अखिलेश यादव ने कहा था कि इस आयोजन से बीजेपी में ज्यादा हलचल होगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी जिना रोकेगी, हम उतना ही महापुरूषों का सम्मान करेंगे। बीजेपी जितना रोकेगी, हम उतना ही महापुरूषों का सम्मान करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी सरकार ने उनकी जयंती पर अवकाश रद्द कर दिया है, सपा की सरकार बनने पर फिर अवकाश घोषित होगा। क्षत्रिय समाज को पहले भी सम्मान दिया है और भविष्य में भी दिया जाएगा।
यहां से बढऩे लगी दूरियां
पिछले दियों राज्यसभा चुनाव के दौरान से ही राजा भैया और अखिलेश यादव के बीच दूरियां बढऩे पैदा हो गईं। राजा भैया मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बेहत करीबी माने जाते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में सपा ने जया बच्चन को पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाया था और बसपा के उम्मीदवार को अपना समर्थन दिया था। वहीं राजा भैया ने बसपा के उम्मीदवार का समर्थन करने से माना कर दिया था। माना जा रहा है कि राजा भैया के सहयोगी विधायकों की मदद से ही बीजेपी राज्यसभा की इस सीट को जीतने में कामयाब रही थी। वहीं राजा भैया ने वोट देने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इसको लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चा होने लगी थी। अब जब राजा भैया ने अपने ट्वीट से अखिलेश पर निशाना साधा है तो इससे लगता है कि अब राजा भैया और अखिलेश यादव के बीच दूरियां काफी बढ़ गई हैं।
इसलिए अब रास्ते हो सकते हैं अलग-अलग
सपा और बसपा का गठबंधन तय हो चुका है। मायावती और अखिलेश यादव दोनों की तरफ से गठबंधन की बात पक्की हो चुकी है। राजा भैया की मायावती से छत्तीस का आंकड़ा है। ऐसे में जब बसपा और सपा एक साथ आ गए हैं तो शायद राजा भैया सपा से दूरियां बनाना ही बेहतर समझ रहे होंगे।
मायावती ने अपने शासन काल में राजा भैया को जेल भेजवा दिया था। उस समय सपा राजा भैया के साथ खड़ी थी और उसके बाद राजा भैया भी हमेशा सपा के साथ रहे, लेकिन अब सपा और बसपा के बीच गठबंधन से राजा भैया का सपा के साथ पहले की तरह रह पाना मुश्किल लग रहा है।