
लखनऊ. दुनिया भर के टीबी मरीजों की कुल संख्या का एक चौथाई भारत में हैं और भारत में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज उत्तर प्रदेश में हैं। ऐसे में टीबी मुक्त भारत के लिए टीबी मुक्त यूपी बनाना एक चुनौती है। विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर टीबी के खात्मे के लिए पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश की शनिवार को लखनऊ में शुरुआत हुई। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा सहित यूपी सरकार के कई मंत्री व स्वास्थ्य महकमे से जुड़े अफसर व फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केंद्रों की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान टीबी के इलाज के लिए 56 ड्रग रेजिस्टेंट टीबी केंद्रों का उद्घाटन हुआ। इसके साथ ही 65 सीबीनेट मशीनें जनता को समर्पित की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी मरीजों को चिह्नित करने के लिए 2 आधुनिक जांचयुक्त मोबाइल वैन को रवाना किया गया। टीबी मरीजों को चिह्नित करने के लिए काम कर रहे फील्ड स्टाफ को टैबलेट प्रदान किये गए। साथ ही टीबी रोड प्लान पुस्तिका का कार्यक्रम में विमोचन हुआ।
यूपी को जरूरत के मुताबिक मिलेंगी मशीनें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि तीन साल पहले एमडीआर टीबी की जांच के लिए 8-9 महीने लगते थे। भारत सरकार ने अब इनकी जांच के लिए पूरे देश में 1000 मशीनें स्थापित की हैं जिससे 7-8 दिन में बीमारी का पता चल जाता है। टीबी के खिलाफ लड़ाई में हर जिले की अपनी कार्ययोजना तैयार हुई है। टीबी के मरीजों का प्राइवेट में भी इलाज होगा तो वहां सरकार दवा देगी। यूपी को जांच के लिए जितनी मशीनों की जरूरत होगी, दी जाएगी।
पोलियो की तर्ज पर टीबी से जंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में टीबी मरीजों की बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश में है। उपचार से पहले जागरूकता बेहतर है। जानकारी के अभाव में मरीज गलत हाथों में पड़ जाता है और बीमारी असाध्य हो जाती है। सरकार योजनाएं बनाती हैं लेकिन अक्सर योजनाएं अधर में लटक जाती हैं। पीएम ने जो लक्ष्य तय किया है, उसमें बड़ी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश की है। पोलियो पूरे देश में समाप्त हो गया था लेकिन यूपी में बना रहा। विशेष अभियान चलाकर इसे खत्म किया गया। सीएम ने कहा कि बीमारी को अन्धविश्वास के साथ जोड़ेंगे तो उसका इलाज नहीं कर सकेंगे। यूपी के हर नागरिक को इस मिशन के साथ जुड़ना होगा। जो तबका टीबी से सबसे ज्यादा पीड़ित है, वह कुपोषण की समस्या से पीड़ित है। इसलिए अब हर टीबी मरीज को सरकार ने पांच सौ रूपये हर माह देने का निर्णय लिया है।
टीबी नोटीफाइड बीमारी घोषित
कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2.5 - 3 लाख चिह्नित टीबी के मरीज हैं। अनुमान है कि इससे दोगुने मरीज अभी चिह्नित नहीं हैं। इनकी पहचान करना बड़ी चुनौती है। टीबी ऐसी संक्रामक बीमारी है जो सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। टीबी को नोटिफाइड बीमारी घोषित किया गया है और अब हर टीबी मरीज के बारे में सरकार को जानकारी देनी ही होगी। प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ ? सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले 3-4 महीने में 1 करोड़ 25 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई और 10 हज़ार टीमें काम कर रही हैं। ढ़ाई लाख टीबी के मरीजों का सरकारी अस्पतलों में इलाज चल रहा है।