UP BJP Core Committee Meeting : यूपी की सियासत में पहली बार सीएम आवास के बजाय डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के यूपी चुनाव 2027 पर मंथन होगा। इस बैठक में संघ और भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में रविवार की शाम एक नई इबारत लिखने जा रही है। योगी सरकार के नौ साल के अब तक के सफर में यह पहला ऐतिहासिक मौका होगा, जब भाजपा की सबसे शक्तिशाली 'कोर कमेटी' की बैठक मुख्यमंत्री आवास या पार्टी मुख्यालय के बजाय किसी अन्य के द्वार पर होगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर शाम 6 बजे होने वाली इस बैठक ने लखनऊ के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को संगठन और सरकार के बीच बदलते शक्ति समीकरणों और 'सामूहिक नेतृत्व' के नए दौर के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले ऐसी महत्वपूर्ण बैठकें हमेशा 5 कालिदास मार्ग स्थित सीएम आवास पर ही होती रही हैं।
सियासी गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि जो अवसर पुराने सहयोगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को बीते वर्षों में नहीं मिला, वह ब्रजेश पाठक के खाते में कैसे आया। हालांकि 2022 के चुनाव से पहले सीएम योगी और संघ के बड़े पदाधिकारी केशव मौर्य के घर केवल 'भोजन' के लिए गए थे, लेकिन नीतिगत निर्णयों वाली आधिकारिक कोर कमेटी की मेजबानी पहली बार किसी डिप्टी सीएम को मिलना बड़े संकेत दे रहा है। माना जा रहा है कि भाजपा अब सत्ता के केंद्र को विकेंद्रीकृत कर कार्यकर्ताओं और जनता के बीच एकजुटता का एक नया संदेश देना चाहती है।
बैठक के एजेंडे की बात करें तो इसमें 'मिशन 2027' के लिए नियुक्तियों और सांगठनिक फेरबदल की एक सख्त 'डेडलाइन' तय की जाएगी। भाजपा ने संघ को आश्वासन दिया है कि 30 मार्च तक सभी जिलों की जिला कार्यकारिणी और 15 अप्रैल तक नई प्रदेश टीम का गठन अनिवार्य रूप से कर लिया जाएगा। इसके साथ ही, 15 मई तक उत्तर प्रदेश के सभी निगमों, आयोगों और बोर्डों में लंबित राजनीतिक नियुक्तियां पूरी करने का रोडमैप तैयार होगा। बैठक में पंचायत चुनावों के मद्देनजर ओबीसी आयोग के गठन और अन्य चुनावी रणनीतियों पर भी गहन मंथन होना तय है।
यह बैठक बीते 20 मार्च को सीएम आवास पर हुई साढ़े चार घंटे की उस मैराथन 'समन्वय बैठक' का अगला चरण है, जिसमें संघ ने मंत्रियों और विधायकों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई थी। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि मंत्रियों का अपने ही अनुषांगिक संगठनों से तालमेल शून्य है और विधायकों की विवादित बयानबाजी जनता में गलत संदेश दे रही है।
आज की बैठक में इन्हीं कमियों को दूर करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी मिटाने और जातिगत बयानों के बजाय 'राष्ट्रवाद' को मुख्य मुद्दा बनाने की रणनीति पर मुहर लगेगी। बैठक में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले माहौल सुधारने की अंतिम बिसात बिछाई जाएगी।