
UP Caste Politics Jat Brahmin Nishad Vote Bank 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराध कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के तीन हत्याकांडों ने सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं छोड़ा, बल्कि जातीय नैरेटिव और वोट बैंक की सियासत को भी गरमा दिया है। अंकित बालियान, विनोद कुमार साहनी और शिवकुमार त्रिपाठी की मौतों के बाद जाट, निषाद और ब्राह्मण समुदाय की राजनीति चर्चा में आ गई है। 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ हर घटना का चुनावी मतलब तलाशा जा रहा है।
अंकित बालियान की हत्या के बाद जाट समाज में आक्रोश फैला। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने जाट समाज की नाराजगी का मुद्दा उठाया। वहीं, एनडीए सहयोगी और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने हत्या को जाति से जोड़ने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि किसी हत्या को जाति से जोड़ना संवेदनहीनता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट सिर्फ एक जाति नहीं, बल्कि कई विधानसभा और लोकसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखने वाला समुदाय हैं। राज्य की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी करीब 3.6 प्रतिशत है, लेकिन क्षेत्रीय दबदबे के कारण उनका वजन कहीं ज्यादा है।
गोंडा में बर्तन व्यापारी विनोद कुमार साहनी की मौत ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया। निषाद पार्टी अध्यक्ष और मंत्री संजय निषाद ने धरना देकर कार्रवाई की मांग की। गिरफ्तार आरोपियों के ऊंची जाति से होने की बात सामने आने के बाद निषाद बनाम ऊंची जाति का नैरेटिव तेजी से फैला। पुलिस जांच में हमले की वजह सोशल मीडिया पोस्ट का विवाद बताई गई। पोस्टमार्टम में गोली या धारदार हथियार के घाव नहीं मिले, मौत लाठी की चोटों से हुई बताई गई। दिलचस्प बात यह रही कि संजय निषाद बीजेपी सहयोगी होते हुए भी प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतरे और उनके साथ विपक्षी सपा के नेता भी नजर आए।
गोरखपुर में बिजली विभाग के ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी की हत्या के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पीड़ित परिवार से मिले और सरकार पर निशाना साधा। घटना को ब्राह्मण सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखा गया। ब्राह्मण समुदाय की आबादी करीब 10 प्रतिशत मानी जाती है और लंबे समय से यह बीजेपी का अहम आधार रहा है। 2027 चुनाव से पहले सपा भी ब्राह्मण वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह घटना ब्राह्मण समीकरण को फिर चर्चा में ले आई।
जाट पश्चिमी यूपी में कई सीटों पर असर रखते हैं। ब्राह्मण 100 से ज्यादा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। निषाद समुदाय पूर्वांचल और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है, जहां संजय निषाद प्रमुख चेहरा हैं। 2027 चुनाव करीब हैं, इसलिए हर बड़े अपराध मामले का राजनीतिक असर स्वाभाविक है। लेकिन सवाल यह है कि न्याय की मांग पीछे छूट रही है या मृतक की जाति आगे आ रही है? अंकित बालियान में जाट, गोंडा में निषाद और गोरखपुर में ब्राह्मण पहचान उभरने से साफ है कि अपराध के साथ-साथ उसका सामाजिक और चुनावी मतलब भी तलाशा जा रहा है।