आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की बहाली का फैसला प्रदेश सरकार ने लिया है। रिश्वत आरोप मामले में हाईकोर्ट द्वारा चार्जशीट रद्द होने के बाद 14 मार्च से उनका निलंबन समाप्त माना जाएगा।
Abhishek Prakash IAS Bribery Allegation Case: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2006 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Abhishek Prakash को बहाल करने का निर्णय लिया है। शासन के सूत्रों के अनुसार उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी। सरकार इस संबंध में औपचारिक रिपोर्ट जल्द ही Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions को भेजेगी।
पूर्व में Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रहे अभिषेक प्रकाश को सोलर कंपनी से प्रोजेक्ट मंजूरी के बदले रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों के चलते निलंबित किया गया था। यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने 20 मार्च 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, फरवरी 2026 में Allahabad High Court Lucknow Bench ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया, जिसके बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हो गया।
आईएएस अभिषेक प्रकाश के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद यह मामला काफी चर्चाओं में रहा था। आरोप था कि एक सोलर ऊर्जा कंपनी से प्रोजेक्ट की मंजूरी के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। इस आरोप के आधार पर राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया था और मामले की जांच शुरू कर दी गई थी।
लेकिन जब यह मामला अदालत में पहुंचा, तो जांच में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। फरवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इस मामले में दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करना संभव नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अभिषेक प्रकाश की सेवा बहाल की जा सकती है।
शासन के सूत्रों के अनुसार, आईएएस अधिकारी के निलंबन से जुड़ी प्रक्रिया में कुछ प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है। नियमों के अनुसार यदि किसी अधिकारी का निलंबन एक वर्ष से अधिक समय तक जारी रहता है, तो इस संबंध में केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होती है।
अभिषेक प्रकाश का निलंबन 20 मार्च 2025 को हुआ था। ऐसे में एक वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही सरकार को इस मामले पर निर्णय लेना था। इसी कारण उनकी बहाली 14 मार्च के बाद से प्रभावी मानी जाएगी और संबंधित रिपोर्ट केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को भेजी जाएगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आईएएस अधिकारियों के सेवा मामलों में केंद्र और राज्य सरकार दोनों की भूमिका होती है। ऐसे में निलंबन, बहाली या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है। इस मामले में भी राज्य सरकार ने नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए पहले निलंबन का निर्णय लिया था और अब अदालत के फैसले के बाद बहाली का निर्णय लिया गया है।
आईएएस अभिषेक प्रकाश प्रदेश में निवेश और उद्योग से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वह Invest UP के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में भी कार्यरत रहे हैं। यह संस्था राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और उद्योगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। उनके कार्यकाल के दौरान प्रदेश में कई बड़े निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई थी। हालांकि रिश्वत के आरोप सामने आने के बाद उन्हें इस पद से हटाकर निलंबित कर दिया गया था।
अभिषेक प्रकाश की बहाली की खबर के बाद प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई अधिकारियों का मानना है कि अदालत के फैसले के बाद यह कदम अपेक्षित था, क्योंकि चार्जशीट रद्द होने के बाद निलंबन जारी रखना कठिन हो जाता है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद जरूरी है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रहे।
सूत्रों के मुताबिक, बहाली के बाद अभिषेक प्रकाश को जल्द ही नई तैनाती दी जा सकती है। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाएगा। सरकार यह भी देखेगी कि उन्हें किस विभाग या पद पर नियुक्त किया जाए। आम तौर पर ऐसे मामलों में अधिकारी को पहले सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाती है और बाद में परिस्थितियों के अनुसार अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती की जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में नियम और प्रक्रियाएं कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। किसी भी अधिकारी के खिलाफ आरोप लगने पर जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। अदालत के फैसले और प्रशासनिक नियमों के आधार पर ही सरकार ने यह निर्णय लिया है।