लखनऊ

सदन में खुलासा: Mayawati को एनएसजी कवर, Akhilesh के पास सबसे बड़ी सुरक्षा फोर्स, सरकार ने रखे चौंकाने वाले आंकड़े

VIP Security: उत्तर प्रदेश विधान परिषद में पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बहस छिड़ गई। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि मायावती, अखिलेश यादव और राजनाथ सिंह को जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त है, जबकि एनएसजी सुरक्षा केवल मायावती के पास है।

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Feb 21, 2026
यूपी सरकार का दावा: मायावती और अखिलेश यादव को सर्वाधिक सुरक्षा, एनएसजी सिर्फ मायावती के पास (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Govt Clarifies Z+ Security for Akhilesh & Mayawati: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के सदस्यों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पर्याप्त सुरक्षा न मिलने और एनएसजी सुरक्षा न दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में उठाए जाने के बाद सरकार ने विस्तृत आंकड़ों के साथ जवाब दिया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उच्च सदन में स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षा प्रदान की जा रही है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया गया है।

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विधान परिषद में उठा सवाल

सपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सुरक्षा में कटौती की गई है और उन्हें एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) की सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस पर सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विस्तार से जवाब देते हुए सुरक्षा व्यवस्था के आंकड़े सदन के पटल पर रखे। मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा मामलों में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरत रही है। सुरक्षा आवंटन तय मानकों और खतरे के आकलन (थ्रेट परसेप्शन) के आधार पर किया जाता है।

किसे कितनी सुरक्षा

सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार-

  • राजनाथ सिंह (पूर्व मुख्यमंत्री) की सुरक्षा में 81 सुरक्षाकर्मियों का नियतन है, जबकि वर्तमान में 82 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
  • मायावती (बसपा सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री) की सुरक्षा में 156 सुरक्षाकर्मियों का नियतन है, जबकि 161 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
  • अखिलेश यादव की सुरक्षा के लिए 186 सुरक्षाकर्मियों का नियतन है और 185 सुरक्षाकर्मी वर्तमान में नियुक्त हैं।
  • इन आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि अखिलेश यादव को सर्वाधिक संख्या में सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए गए हैं।

जेड प्लस सुरक्षा और एनएसजी का मुद्दा

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। हालांकि, एनएसजी सुरक्षा केवल मायावती को प्राप्त है। यहां उल्लेखनीय है कि एनएसजी सुरक्षा केंद्र सरकार द्वारा विशेष खतरे के आकलन के आधार पर दी जाती है और यह सामान्य श्रेणी की सुरक्षा से अलग होती है। सरकार का तर्क है कि यह निर्णय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर होता है, न कि किसी राजनीतिक पक्षपात के चलते।

सियासी बयानबाज़ी तेज़

सुरक्षा के मुद्दे पर सदन में हुई बहस के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। सपा नेताओं का कहना है कि अखिलेश यादव को मिलने वाली सुरक्षा में कमी आई है और यह राजनीतिक कारणों से किया गया है। वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया है कि सुरक्षा पूरी तरह पेशेवर मानकों के अनुसार दी जा रही है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे अक्सर सियासी बहस का हिस्सा बन जाते हैं, खासकर जब विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने हों।

सरकार का पक्ष: सभी की सुरक्षा सर्वोपरि

केशव मौर्य ने सदन में कहा कि राज्य सरकार केवल पूर्व मुख्यमंत्रियों ही नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी उपमुख्यमंत्रियों से लेकर प्रदेश के एक-एक व्यक्ति की सुरक्षा की चिंता कर रही है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था एक सतत प्रक्रिया है और समय-समय पर खतरे के स्तर की समीक्षा की जाती है। यदि आवश्यकता होती है तो सुरक्षा बढ़ाई भी जाती है।

सुरक्षा आवंटन कैसे होता है

सुरक्षा प्रदान करने की प्रक्रिया बहुस्तरीय होती है। इसमें राज्य और केंद्र की खुफिया एजेंसियां संभावित खतरे का आकलन करती हैं। इसी आधार पर वीआईपी सुरक्षा की श्रेणियां तय की जाती हैं,जेड प्लस, जेड, वाई, एक्स आदि। जेड प्लस श्रेणी में आमतौर पर उच्च प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी, एस्कॉर्ट वाहन, पायलट वाहन और अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण शामिल होते हैं। एनएसजी सुरक्षा इससे भी अधिक विशेष और उच्च जोखिम वाले मामलों में दी जाती है।

विपक्ष का सवाल: क्या खतरे का आकलन सार्वजनिक हो

विपक्षी दलों का तर्क है कि सुरक्षा आवंटन के मापदंडों को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि खतरे के आकलन से जुड़ी जानकारी गोपनीय होती है और उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

जनता की नजर में मुद्दा

सुरक्षा का मुद्दा आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग मानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और प्रमुख नेताओं को पर्याप्त सुरक्षा मिलनी चाहिए, जबकि कुछ का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और इसे केवल पेशेवर मानकों पर आधारित होना चाहिए।

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