लखनऊ

UP में संपत्ति रजिस्ट्री के नियम बदले: अब आधार से होगी पहचान, फर्जी रजिस्ट्रियों पर लगेगी लगाम

UP Implements Biometric & Aadhaar Verification : उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। 1 फरवरी 2026 से सभी उप निबंधक कार्यालयों में आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा। फर्जी रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगेगी, डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित होंगे और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित होगा।

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Jan 30, 2026
1 फरवरी 2026 से सभी उप निबंधक कार्यालयों में Aadhaar प्रमाणीकरण अनिवार्य, E-KYC and Biometrics सत्यापन से बढ़ेगी पारदर्शिता (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

UP Property Rules: उत्तर प्रदेश में संपत्ति पंजीकरण प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री के दौरान आधार आधारित पहचान सत्यापन को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत 1 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में आधार प्रमाणीकरण लागू होगा। स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने विधान भवन में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय फर्जी रजिस्ट्रियों, कूटरचित दस्तावेजों और भूमि विवादों पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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क्या बदलेगा 1 फरवरी से

नई व्यवस्था के तहत अब संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान निष्पादकों (Executants),क्रेता-विक्रेता (पक्षकार),गवाह सभी की पहचान आधार प्रमाणीकरण के जरिए सत्यापित की जाएगी। यह प्रक्रिया ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में पूरी होगी। इससे किसी भी व्यक्ति द्वारा फर्जी पहचान के आधार पर संपत्ति पंजीकरण कराना लगभग असंभव हो जाएगा।

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक से शुरू हुई पहल

मंत्री जायसवाल ने बताया कि 28 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। बैठक में निर्देश दिए गए थे कि संपत्ति पंजीकरण के दौरान छद्म व्यक्तियों द्वारा कराई जा रही फर्जी रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आधार प्रमाणीकरण लागू किया जाए। इसी क्रम में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी गई हैं।

नियमावली 2024 के तहत लागू होगी व्यवस्था

2 अगस्त 2024 को जारी अधिसूचना के तहत रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 69 के अंतर्गत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दस्तावेज रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2024 को प्रभावी किया गया है। इस नियमावली के अनुसार, आधार संख्या धारकों की पहचान डिजिटल माध्यम से होगी। ई-केवाईसी के जरिए डेटा सत्यापन। बायोमेट्रिक पहचान (फिंगरप्रिंट/आइरिस) .ई-सिग्नेचर द्वारा दस्तावेज प्रमाणीकरण .

क्या होंगे इसके फायदे

1. फर्जीवाड़े पर रोक

छद्म नाम और नकली पहचान से कराई जाने वाली रजिस्ट्रियों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा।

2. कानूनी विवादों में कमी

भूमि और संपत्ति से जुड़े मुकदमों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

3. रिकॉर्ड की सुरक्षा

डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और छेड़छाड़ की संभावना घटेगी।

4. पारदर्शी प्रक्रिया

रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनेगी।

5. डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती

  • यह पहल राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस मिशन के अनुरूप है।
  • पुराने दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन अंतिम चरण में

रविंद्र जायसवाल ने यह भी बताया गया कि वर्ष 2002 से 2017 तक के पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग और इंडेक्सिंग परियोजना लगभग पूरी हो चुकी है।

  • 99.11% इंडेक्सिंग पूर्ण
  • 98.37% स्कैनिंग पूर्ण

शेष कार्य एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर और प्रयागराज में अगले छह महीनों में पूरा होगा। इस परियोजना की अवधि छह माह बढ़ाई गई है और इसके लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं होगी।

दो स्तर पर सत्यापन

डिजिटाइजेशन कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजों की दो स्तर पर जांच की जा रही है, जिससे कूटरचना और फर्जी दस्तावेजों पर नियंत्रण स्थापित हो सके।

  • नागरिकों को क्या फायदा होगा
  • संपत्ति खरीद-फरोख्त सुरक्षित
  • धोखाधड़ी का जोखिम कम
  • रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध
  • रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज और पारदर्शी

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